
नेपाल में काठमांडू समेत कई शहरों में Gen-Z के युवाओं का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। इस आंदोलन के कारण नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है। मालूम हो कि सोशल मीडिया को बंद करने के बाद सोमवार से युवाओं ने आंदोलन शुरू किया था। हालांकि युवाओं का कहना है कि यह केवल सोशल मीडिया के बंद करने का मुद्दा नहीं है बल्कि फ्रीडम ऑफ स्पीच का है। जिसे दबाने की कोशिश केपी शर्मा ओली सरकार कर रही है। आंदोलनकारी युवाओं ने ओली सरकार को हटाने की मांग की थी। सोमवार से शुरू हआ हिंसक प्रदर्शन दूसरे दिन मंगलवार को भी जारी रहा। इसमें निशाने पर नेता और मंत्री रहे। उनके घरों में आगजनी की गई। युवाओं ने राष्ट्रपति के निजी आवास में भी तोड़फोड़ की। ओली सरकार के चार मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। मंत्री और सांसद लापता हो गए हैं। प्रदर्शन में अब तक 19 युवाओं की मौत हो चुकी है और 350 घायल हुए। प्रदर्शन को देखते हुए इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया।
श्रीलंका में भी बदली सरकार
वर्ष 2022 में लोगों ने राष्ट्रपति गोटाबाया के खिलाफ आंदोलन किया। यह आंदोलन सोशल मीडिया के जरिये चलाया गया। यह इस कदर तेज हुआ कि वहां सत्ता परिवर्तन हो गया।
बंगलादेश की तर्ज पर नेपाल में बगावत
बंगलादेश की तर्ज पर नेपाल में बगावत हो रही है। पिछले वर्ष 2024 में बंगलादेश में भी इसी तरह युवाओं ने सरकार का तख्ता पलट दिया था। जिससे पीएम शेख हसीना को बंगलादेश छोड़ना पड़ा था। इसके बाद वहां मोहम्द यूनुस ने अंतरिम सरकार बनाई। इसी तरह नेपाल में भी युवा सरकार हटाने की मांग कर रहे हैं। वे यहां अंतरिम सरकार गठन की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन का यह है कारण
Gen-Z युवाओं का ग्रुप है। जोकि सोशल नेटवर्किंग से जुड़ा है। सरकार ने सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म को बंद कर दिया। इसके बाद ही युवाओं का आंदोलन भड़का। केवल टिक टॉक को बंद नहीं किया गया था। हालांकि जब आंदोलन तेज हो गया तो सरकार ने सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर से बैन हटा दिया। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
Gen-Z के युवाओं का कहना है कि सरकार में भाई भतीजावाद है। नेताओं के बच्चों का बेहतर ध्यान रखा जाता है लेकिन नेपाल के युवाओं के भविष्य की चिंता सरकार को नहीं है। यहां बेरोजगारी बढ़ रही है। जिससे युवाओं को पलायन करके विदेश जाकर रोजगार करना पड़ रहा है। युवाओं ने ओली सरकार पर भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया।