
जबलपुर। जबलपुर की सुहागी बस्ती में आज विराट हिन्दू सम्मेलन का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। मुख्य वक्ता दत्तात्रेय होसबोले ने अपने उद्बोधन में कहा कि सम्पूर्ण देश का हिन्दू समाज यदि एक परिवार की भावना से एकजुट होकर कार्य करे, तभी राष्ट्र समर्थ बनेगा। उन्होंने कहा कि भारत की हिन्दू संस्कृति सृष्टि की प्रत्येक वस्तु में ईश्वर का दर्शन करती है तथा कन्या, ज्ञान और समृद्धि की पूजा करती है। ऐसी संस्कृति में भी यदि महिलाओं एवं कन्याओं की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की आवश्यकता पड़ती है, तो समाज को आत्ममंथन कर सुधार की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

हिंदू जीवन दर्शन का आधार
सरकार्यवाह ने अपने उद्बोधन में कहा कि धरती को माँ कहने वाली संस्कृति केवल हिन्दू संस्कृति है। उन्होंने वैदिक उद्धरण देते हुए कहा कि अथर्ववेद में स्पष्ट रूप से उल्लेख है— “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः”, अर्थात यह भूमि मेरी माता है और मैं उसका पुत्र हूँ। उन्होंने कहा कि यह भाव आधुनिक नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से हिन्दू जीवन दर्शन का मूल आधार रहा है।

कन्या पूजन की परंपरा केवल हिन्दू संस्कृति में
सरकार्यवाह ने कहा कि कन्या पूजन की परंपरा विश्व की किसी अन्य संस्कृति में नहीं मिलती। केवल हिन्दू संस्कृति ही ऐसी है जहाँ कन्या को देवी स्वरूप मानकर पूजा जाती है। यह परंपरा नारी सम्मान, मातृत्व और सृजनशीलता के प्रति हिन्दू समाज की गहन श्रद्धा को दर्शाती है। इन परंपराओं के संरक्षण और व्यवहारिक पालन के लिए ऐसे सम्मेलनों का आयोजन आवश्यक है।

विश्व गुरु बनने के लिए हिंदू जागरण आवश्यक
सरकार्यवाह ने कहा कि सामाजिक विघटन और आपसी फूट देश के विभाजन का कारण बने। समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर वंचित एवं दलित समाज को सशक्त बनाना आवश्यक है। हिन्दू समाज ने कभी आक्रामकता का मार्ग नहीं अपनाया, लेकिन राष्ट्र रक्षा और भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने के लिए हिन्दू जागरण अनिवार्य है। हिन्दू सम्मेलन किसी अन्य समाज को भयभीत करने के लिए नहीं, बल्कि समाज को संगठित और उत्तरदायी बनाने के उद्देश्य से आयोजित किए जा रहे हैं।
हिंदू शब्द का भावार्थ
कार्यक्रम में उपस्थित संत गिरिशानंद महाराज ने “हिन्दू” शब्द का भावार्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि जो अपने आचार और विचार से हीनता का त्याग करता है वही हिन्दू कहलाता है। उन्होंने हिन्दू समाज को भगवान का विराट शरीर बताते हुए कहा कि जैसे शरीर के सभी अंग मिलकर एक देह बनाते हैं, वैसे ही समाज के सभी वर्गों को समरसता से रहना चाहिए। निषादराज और शबरी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज में भेदभाव का कोई स्थान नहीं है।
मातृशक्ति समाज की आधारशिला
कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. अमिता सक्सेना ने कहा कि मातृशक्ति परिवार रूपी घर को सीमेंट की तरह जोड़कर रखती है। बच्चों में अच्छे संस्कार और मजबूत चरित्र का निर्माण मातृशक्ति के माध्यम से ही होता है। समाज निर्माण में नारी की भूमिका केंद्रीय है।
वैदिक परंपरा से कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम से पूर्व पूरे बस्ती क्षेत्र में विशाल बाइक रैली निकाली गई। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक परंपरानुसार गौपूजन, तुलसी पूजन एवं कन्या पूजन से हुआ। भारत माता की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पण किया गया। मुख्य वक्ता के उद्बोधन के पश्चात विशाल जनसमूह ने सामूहिक रूप से भारत माता की आरती की।
कार्यक्रम की समाप्ति पर श्री अखिलेश ने सभी अतिथियों, सहभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम उपरांत भंडारे का वितरण किया गया। सुहागी बस्ती के प्रत्येक घर से नागरिकजन उत्साह और गर्व के साथ सम्मेलन में सहभागी बने। बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक, समूची बस्ती राष्ट्र, संस्कृति और समरसता के इस आयोजन में एक परिवार की तरह सम्मिलित हुई।