श्रीकृष्ण ने दिया मातृ-पितृ भक्ति का संदेश: स्वामी अशोकानंद

जबलपुर। भक्ति धाम गौरी घाट में सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ हुआ। पितृपक्ष के इस पावन अवसर पर प्रवचन में परम पूज्य स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने कहा कि नारायण ने अपने प्रत्येक अवतार में मातृ-पितृ भक्ति का संदेश दिया है। श्रीकृष्ण ने स्वयं जन्म काल से ही पारिवारिक मान्यताओं का पालन कर समाज को आदर्श प्रस्तुत किया।

श्राद्ध पक्ष का महत्व

स्वामी अशोकानंद जी ने कहा कि हिंदू धर्मग्रंथों में श्राद्ध पक्ष (पितृपक्ष) का अत्यंत महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस समय पितरों की आत्माएं धरती पर आती हैं और उनके लिए किए गए तर्पण, दान और भोजन से वे तृप्त होकर वंशजों को आशीर्वाद देती हैं। विशेष रूप से वृद्धजनों, संतों और ब्राह्मणों को भोजन कराना पुण्यकारी होता है। इससे पितृ प्रसन्न होकर परिवार को सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करते हैं।

अन्नदान सर्वोत्तम दान

उन्होंने कहा कि पितृपक्ष में भोजन कराना केवल धार्मिक कर्तव्य ही नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। इसे मानवता का सर्वोच्च रूप माना जाता है। शास्त्रों में अन्नदान को सभी दानों में श्रेष्ठ बताया गया है। अन्नदान से जहां पितरों को तृप्ति मिलती है, वहीं दानदाता के जीवन में भी सकारात्मक ऊर्जा और पुण्य का संचार होता है।

15 वर्षों से जारी परंपरा

भक्ति धाम गौरी घाट में भागवत सेवा समिति जबलपुर के तत्वावधान में पितृपक्ष पर पिछले 15 वर्षों से निरंतर श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष भी 7 सितंबर से 14 सितंबर तक प्रतिदिन सायं 4 बजे कथा का आयोजन हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा वाचक स्वामी अशोकानंद जी महाराज श्रद्धालुओं को भागवत रसपान करा रहे हैं। समिति ने सभी श्रद्धालुओं से समय पर उपस्थित होने का आग्रह किया है।

पूजन-अर्चन और श्रद्धालुओं की उपस्थिति

आज के प्रथम दिवस पर शास्त्रोक्त विधि से पूजन-अर्चन आचार्य श्री रामफल शास्त्री, पं. आशीष लालू महाराज, पं. चंद्रिका प्रसाद और पुष्पराज तिवारी द्वारा संपन्न कराया गया। इस अवसर पर जेठानंद खत्री, ईश्वर नाथानी, विजय पंजवानी, हरि रोहाणी, करिश्मा शर्मा, जमनादास खत्री, प्रहलाद लालवानी, प्रिंस पंजवानी, वेदांत शर्मा, जय वाशानी, दिलीप तलरेजा और उमेश पारवानी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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