
पन्ना। पन्ना स्थित रमणीय स्थली तपोभूमि श्री 108 प्राणनाथ चोपड़ा मंदिर में 26 दिसंबर से निरंतर 151 साप्ताहिक पाठ पारायण महायज्ञ चल रहा है। पाठ पारायण का वचन ब्रह्मा मुनियों द्वारा किया जा रहा है एवं विद्वानों एवं विदुषी द्वारा प्रतिदिन महामति श्री प्राणनाथ जी की वाणी का वर्णन विस्तार रूप से उपस्थित श्रद्धालुओं को समझाया जा रहा है। इसके साथ भजन कीर्तन भी चल रहे हैं। स्थानीय एवं देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु धर्म लाभ ले रहे हैं।

40 वर्षों से निरंतर हो रहा है पाठ पारायण का आयोजन
विगत 40 वर्षों से श्री प्राणनाथ धर्म प्रचार संगीत मंडल के द्वारा यह आयोजन निरंतर किया जा रहा है। समिति के सदस्य तिलक राज शर्मा ने बताया कि बीते 40 वर्षों से मंदिर प्रांगण में उक्त धार्मिक आयोजन किया जा रहा है और यह इसका 41वां वर्ष है। इसी कारण कार्यक्रम को विस्तार रूप देते हुए 151 पाठ पारायण का आयोजन किया जा रहा है। पूरा कार्यक्रम श्री 108 प्राणनाथ जी मंदिर ट्रस्ट के संरक्षण में संपन्न हो रहा है।
महाराजा छत्रसाल ने इसी स्थल पर की थी महामति की प्रथम आरती
जानकारी देते हुए श्री 108 प्राणनाथ जी मंदिर के पूर्व सचिव राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि शहर से दूर पहाड़ियों के बीच स्थित श्री प्राणनाथ चोपड़ा मंदिर वह पवित्र स्थल है, जहां बुंदेलखंड केसरी महाराजा छत्रसाल ने अपने सतगुरु श्री प्राणनाथ जी को पूर्ण ब्रह्म स्वरूप की पहचान कर किलकिला नदी के अमराई घाट से पालकी में बिठाकर तथा अपने कंधों का सहारा देकर विक्रम संवत 1740 में इसी पवित्र स्थल तक लेकर आए थे।
उनके सम्मान में प्रथम द्वार से अपनी पाग तथा रानी द्वारा अपनी साड़ी का पावड़ा बिछाकर प्रथम आरती की गई थी। तभी से इस तपोभूमि में अनेक ब्रह्म मुनियों ने तपस्या कर पूर्ण ब्रह्म परमात्मा के साक्षात दर्शन किए हैं।
गंगा-जमुना चोपड़ा का पवित्र जल और शांत वातावरण
चोपड़ा मंदिर के समीप गंगा और जमुना नामक दो चोपड़ा स्थित हैं, जिनका जल अत्यंत पवित्र एवं स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। यह रमणीय स्थली आज भी श्रद्धालुओं को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है।
रिपोर्ट: राकेश कुमार शर्मा