
जबलपुर। शहर में बिजली नेटवर्क को मजबूत करने के लिए लगातार सुधार कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्थिति कई इलाकों में इन दावों से अलग नजर आती है। शहर की कुछ कॉलोनियों और बस्तियों में आज भी बिजली की लाइनें पक्के पोल के बजाय बांस-बल्ली के सहारे खींची गई हैं। कई जगह मीटर सड़क किनारे खुले में लगे हैं, जबकि तार नीचे तक झूल रहे हैं। ऐसे स्थानों पर बारिश या किसी तकनीकी खराबी की स्थिति में करंट फैलने का खतरा और बढ़ जाता है।
बिजली अधोसंरचना को बेहतर बनाने के लिए आरडीएसएस समेत विभिन्न योजनाओं पर बड़ी राशि खर्च की जा रही है। नए उपकरण लगाने और नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के साथ पुराने सिस्टम को बदलने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसके बावजूद शहर के कुछ हिस्सों में प्राथमिक स्तर की समस्याएं अब तक दूर नहीं हो सकी हैं।
अस्थायी कनेक्शन का स्थायी इंतजाम
पाटन रोड के करमेता क्षेत्र में ग्रैंड आईटीआई के पीछे रहने वाले लोगों को लंबे समय से व्यवस्थित बिजली नेटवर्क का इंतजार है। क्षेत्र में कुछ उपभोक्ताओं के मीटर सड़क के किनारे लगे दिखाई देते हैं। बिजली की केबल भी कई जगह कम ऊंचाई पर है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है।
मेडिकल क्षेत्र के आगे शास्त्री नगर, महाराजपुर बायपास और कछपुरा के गणेश नगर में भी बिजली के पोल और लाइनों को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। लोगों का कहना है कि अस्थायी व्यवस्था को हटाकर स्थायी पोल लगाने की जरूरत है।
पुराने शहर में उलझे तारों का नेटवर्क
पुराने और व्यावसायिक इलाकों में दूसरी समस्या तारों की अधिकता है। फुहारा, अंधेरदेव और लार्डगंज जैसे क्षेत्रों में कई पोल पर बिजली और संचार से जुड़े तार बड़ी संख्या में दिखाई देते हैं। इनके कारण लाइन की पहचान और मरम्मत का काम भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
कुछ जगहों पर पुराने तारों और कनेक्शनों के साथ मीटर भी अव्यवस्थित तरीके से लगे हैं। स्थानीय स्तर पर अवैध कनेक्शन की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती हैं। ऐसे मामलों की नियमित जांच नहीं होने पर नेटवर्क और अधिक अव्यवस्थित होने की आशंका रहती है।
नेता कॉलोनी में सुरक्षा को लेकर चिंता
आधार सिंह वार्ड की नेता कॉलोनी में रहवासियों ने बिजली के नीचे झूलते तारों को लेकर चिंता जताई है। लोगों के अनुसार क्षेत्र में शॉर्ट सर्किट के कारण पहले भी आग की घटनाएं हो चुकी हैं। बारिश के दौरान खुले तार और विद्युत लाइनें ज्यादा जोखिम पैदा करती हैं।
रहवासियों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी गई, लेकिन तारों को व्यवस्थित करने का स्थायी समाधान अभी तक नहीं हुआ।
ट्रांसफार्मर के आसपास भीड़
शहर में कुछ स्थानों पर ट्रांसफार्मर के नीचे या आसपास दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। विद्युत उपकरणों के इतने करीब लोगों की आवाजाही रहने से दुर्घटना की स्थिति में नुकसान की आशंका बढ़ जाती है। वहीं, कुछ जगह बिजली लाइनें जमीन के काफी करीब होने की शिकायतें भी सामने आती हैं।
आयोजनों में सामने आती हैं कमियां
त्योहारों के दौरान बिजली विभाग द्वारा अस्थायी कनेक्शन और पंडालों की विद्युत व्यवस्था की जांच की जाती है। गणेशोत्सव के दौरान भी कई स्थानों पर तारों की खराब टेपिंग, कम ऊंचाई पर लाइन और मानकों के अनुरूप वायरिंग नहीं होने जैसी कमियां सामने आई थीं।
हालांकि आयोजन खत्म होने के बाद भी शहर की स्थायी विद्युत व्यवस्था की नियमित निगरानी उतनी ही जरूरी है। खासकर उन इलाकों में जहां पुराने तार, खुले कनेक्शन और कमजोर ढांचा लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके हैं।
स्ट्रीट लाइट के तार भी खुले
शहर के विभिन्न मार्गों पर स्ट्रीट लाइट और हाईमास्ट से जुड़े तारों को लेकर भी शिकायतें हैं। दमोह नाका, आईटीआई, सिविल लाइंस, मेडिकल रोड और सगड़ा जैसे क्षेत्रों में कहीं तार खुले पड़े हैं तो कहीं जोड़ पर केवल टेप का इस्तेमाल किया गया है।
विद्युत सुरक्षा के लिहाज से ऐसे स्थानों पर सुरक्षित बॉक्स, बेहतर इंसुलेशन, अर्थिंग और तारों की उचित व्यवस्था जरूरी है। सड़क के किनारे खुले तार किसी वाहन या राहगीर के संपर्क में आने पर गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं।
योजनाओं के साथ निगरानी भी जरूरी
बिजली नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण पर लगातार खर्च होने के बावजूद यदि कुछ इलाकों में पोल के स्थान पर बांस-बल्ली और व्यवस्थित मीटरिंग के बजाय खुले में लटकते मीटर नजर आ रहे हैं, तो सुधार कार्यों की प्राथमिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जरूरत है कि बड़े प्रोजेक्ट के साथ छोटे लेकिन जोखिम वाले क्षेत्रों की समस्याओं को भी प्राथमिकता दी जाए। अस्थायी लाइनों को स्थायी नेटवर्क में बदला जाए, पुराने तारों को हटाया जाए और खुले मीटर व कनेक्शनों को सुरक्षित किया जाए, ताकि बिजली सुधार का वास्तविक असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई दे।
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