मतदाता सूची के मुद्दे पर लामबंद हुआ विपक्ष, इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट की ओर किया रुख

नई दिल्ली। मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर विपक्षी दलों ने अपनी आवाज बुलंद की है। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने इन मुद्दों पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग उठाते हुए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। पुलिस ने मार्च को रास्ते में रोक दिया, जिसके बाद विपक्षी नेताओं की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई।

मार्च में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव सहित विपक्ष के कई नेता शामिल हुए। विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर आपत्तियां उठाईं।

चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग

विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर भी अपनी आपत्तियां जाहिर कीं। गठबंधन का कहना है कि मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों का उचित समाधान होना चाहिए, ताकि चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों का भरोसा कायम रहे।

इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात कर अपनी चिंताएं रखने की इच्छा जताई थी। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं की और मुद्दों को उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से अदालत के सामने रखने की बात कही। इसके बाद राहुल गांधी सहित विपक्ष के 11 नेताओं की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका दायर की गई।

याचिका में मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे

याचिका में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग से संबंधित फैसलों के रिकॉर्ड तलब करने और मतदाता सूची में कथित विसंगतियों की जांच की मांग की है।

राजनीतिक बहस के बीच न्यायिक प्रक्रिया पर नजर

इंडिया गठबंधन के इस मार्च के बाद मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष जहां इन मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोपों पर अंतिम निर्णय संबंधित तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।