पन्‍ना में हाथियों के पुराने ठिकाने की दीवार पर प्रकृति का पहरा, दशकों से कायम पेड़ों का अस्तित्व

200 से 250 मीटर लंबी पत्थर और चूना-गच्ची से बनी दीवार पर उगे हैं दर्जनों विशाल पेड़

राकेश कुमार शर्मा

पन्ना। ऐतिहासिक नगरी पन्ना में राजशाही दौर की विरासत से जुड़ा एक अनूठा नजारा आज भी लोगों को आश्चर्यचकित कर रहा है। यहां पुराने हाथीखाने की करीब 200 से 250 मीटर लंबी और छह फीट चौड़ी दीवार पर दर्जनों बड़े-बड़े गुंजा के पेड़ उगे हुए हैं। खास बात यह है कि पत्थर और चूना-गच्ची से बनी इस पुरानी दीवार पर उगे पेड़ लंबे समय से जीवित हैं और बारहमासी हरे दिखाई देते हैं।

स्थानीय मान्यता के अनुसार, सदियों पहले इस स्थान पर पन्ना महाराज के हाथी रखे जाते थे। हाथियों को इन पेड़ों की पत्तियां खिलाई जाती थीं। समय के साथ राजशाही का दौर समाप्त हो गया, लेकिन दीवार पर उगे पेड़ों का अस्तित्व आज भी बना हुआ है।

कई बार काटने के बाद भी निकल आती हैं नई शाखाएं

आगरा मोहल्ला निवासी निक्की राजा (30 वर्ष), बृजेन्द्र रैकवार (35 वर्ष) और शिवा यादव ने बताया कि गुंजा के ये पेड़ वर्षों से इसी तरह दीवार पर उगे दिखाई दे रहे हैं। मोहल्लेवासियों के मुताबिक, वे करीब 25 वर्षों से इन पेड़ों को इसी स्थिति में देखते आ रहे हैं। कई बार पेड़ों की डालियां काटी गईं, लेकिन कुछ समय बाद फिर नई शाखाएं निकल आती हैं। पेड़ों की यह विशेषता लोगों के लिए कौतूहल का विषय बनी हुई है।

दीवार में समा गया पेड़ का विशाल तना

दीवार पर उगे एक पेड़ का तना बढ़ते-बढ़ते दीवार के भीतर समा गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इसकी मोटाई करीब ढाई फीट है। लगभग 15 फीट ऊंची बताई जाने वाली इस दीवार पर एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनों बड़े पेड़ अलग-अलग स्थानों पर उगे हुए हैं। पुराने समय में निर्मित इस दीवार में आधुनिक सीमेंट के बजाय पत्थर और चूना-गच्ची का इस्तेमाल किया गया था।

संरक्षण की जरूरत, तस्वीरों में कैद है अनूठा नजारा

सदियों पुरानी बताई जाने वाली इस दीवार और उस पर उगे पेड़ों का दृश्य पन्ना की ऐतिहासिक विरासत के साथ प्रकृति के अनूठे सामंजस्य को दर्शाता है। इस स्थान के फोटो भी उपलब्ध हैं, जिनमें दीवार पर उगे पेड़ों को देखा जा सकता है। ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए दीवार के निर्माण काल और पेड़ों की वास्तविक आयु का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों से अध्ययन कराया जाना उपयोगी होगा। साथ ही, इस विरासत के संरक्षण की दिशा में भी पहल की जा सकती है।