आई एस ई टी रुड़की संस्थान का जबलपुर शहर में होगा मध्य प्रदेश का पहला एवं देश का 15 चैप्टर

देश का 15वां लोकल चैप्टर, भूकंप अनुसंधान और माइक्रोजोनेशन को मिलेगा बढ़ावा

जबलपुर। भूकंप प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध और अध्ययन को बढ़ावा देने की दिशा में जबलपुर को महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। इंडियन सोसाइटी ऑफ अर्थक्वेक टेक्नोलॉजी (ISET), रुड़की ने जबलपुर चैप्टर की स्थापना की घोषणा की है। यह मध्यप्रदेश का पहला और देश का 15वां लोकल चैप्टर होगा। संस्था की 224वीं राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में इसकी घोषणा की गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. बीके महेश्वरी, राष्ट्रीय सचिव डॉ. पीसी अश्विन कुमार और कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों ने इस निर्णय की पुष्टि की।

डॉ. आर. ग्रोवर अध्यक्ष, डॉ. संजय वर्मा सचिव नियुक्त

ISET के जबलपुर चैप्टर की जिम्मेदारी डॉ. आर. ग्रोवर को अध्यक्ष और डॉ. संजय वर्मा को सचिव के रूप में सौंपी गई है। इसके अलावा डॉ. मनीष दुबे, प्रोफेसर वेदांत श्रीवास्तव और डॉ. निरंजन दामले को प्रबंध समिति का सदस्य मनोनीत किया गया है। इंजीनियर सागर श्रीवास्तव, संजय सेन, पंकज सेन, मोहन चौधरी और विनय चौरसिया को कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया है।

भूकंप से जुड़े शोध और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम होंगे

22 मई 1997 को जबलपुर में आए भूकंप के बाद से ही शहर में भूकंप संबंधी अध्ययन और अनुसंधान के लिए विशेष संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जाती रही है। नए चैप्टर की स्थापना से भूकंप प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध, सेमिनार और कार्यशालाओं के आयोजन का रास्ता खुलेगा। इसके माध्यम से वर्ष 1997 में आए भूकंप के कारणों का अध्ययन करने और भविष्य में इस तरह की आपदाओं की संभावनाओं को समझने के लिए शोध गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकेगा।

अधूरे माइक्रोजोनेशन कार्य को पूरा कराने का प्रयास

ISET की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. संजय वर्मा ने बताया कि जबलपुर शहर का माइक्रोजोनेशन कार्य वर्ष 2001 से 2004 के बीच कराया गया था। हालांकि, यह काम दो चरणों तक ही पूरा हो सका और शेष दो चरणों का कार्य अब भी लंबित है। उन्होंने कहा कि जबलपुर चैप्टर के माध्यम से इस अधूरे कार्य को पूरा कराने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। माइक्रोजोनेशन अध्ययन से शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में भूकंप के संभावित प्रभावों और जोखिमों को समझने में मदद मिल सकती है।

देश के 14 शहरों में पहले से सक्रिय हैं लोकल चैप्टर

डॉ. वर्मा के अनुसार, ISET के अन्य 14 लोकल चैप्टर रुड़की, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे, अमरावती, नागपुर, धनबाद, गुवाहाटी, वेल्लोर, गुंटूर और वाराणसी में सक्रिय हैं। ये चैप्टर भूकंप अनुसंधान एवं अध्ययन के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।

तकनीकी संस्थानों में बनेंगे स्टूडेंट्स चैप्टर

जबलपुर में भूकंप विज्ञान और तकनीकी अनुसंधान को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए शहर के तकनीकी संस्थानों में जल्द ही स्टूडेंट्स चैप्टर गठित करने की योजना है। इससे विद्यार्थियों को भूकंप प्रौद्योगिकी, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और अनुसंधान गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल सकेगा।

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