
जबलपुर। शक्ति की आराधना के महापर्व शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की उपासना के साथ महाअष्टमी, महानवमी और विजयादशमी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इन पर्वों पर देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा, दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन, पूर्णाहुति और कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे ने बताया कि श्रद्धालुओं को तिथि और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजन-विधान संपन्न करना चाहिए। वर्ष 2026 में विजयादशमी का पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
महाअष्टमी पर मां महागौरी की आराधना
नवरात्र की अष्टमी तिथि देवी उपासना की दृष्टि से विशेष मानी जाती है। इस दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। श्रद्धालु विधि-विधान से माता का पूजन कर पुष्प, अक्षत, फल और नैवेद्य अर्पित करते हैं। दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्र जाप और आरती के माध्यम से मां की आराधना की जाती है। कई परिवारों में महाअष्टमी पर विशेष व्रत और रात्रि पूजन की परंपरा भी है।
महानवमी पर हवन और कन्या पूजन
महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। इस दिन हवन, पूर्णाहुति और कन्या पूजन को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु नौ कन्याओं को देवी के स्वरूप के रूप में पूजकर उन्हें भोजन कराते हैं और सामर्थ्य के अनुसार उपहार तथा दक्षिणा देते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र के किसी भी दिन कन्या भोज कराया जा सकता है, लेकिन अष्टमी और नवमी पर इसका विशेष महत्व माना जाता है।
तिथि के अनुसार करें व्रत और पूजन
ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार, अष्टमी और नवमी तिथियों के निर्धारण में पंचांग की गणना महत्वपूर्ण होती है। तिथि का आरंभ और समापन सूर्योदय के समय से अलग हो सकता है, इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजन करना चाहिए। अष्टमी व्रत, नवमी व्रत, कन्या पूजन और व्रत पारण का समय तय करने से पहले स्थानीय तिथि-निर्णय की पुष्टि करना उचित है।
साधना और उपासना का पर्व है महाअष्टमी
शारदीय नवरात्र के नौ दिन मां दुर्गा की साधना और आराधना के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनमें महाअष्टमी पर मां महागौरी की पूजा के माध्यम से सुख, शांति और कल्याण की कामना की जाती है। श्रद्धालु उपवास, मंत्र जाप, दुर्गा सप्तशती के पाठ और दीप प्रज्ज्वलन के साथ देवी की उपासना करते हैं। यह अवसर आत्मसंयम, श्रद्धा और सकारात्मकता के संकल्प को मजबूत करने का भी संदेश देता है।
20 अक्टूबर को मनाई जाएगी विजयादशमी
शारदीय नवरात्र के समापन पर विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 20 अक्टूबर को है। विजयादशमी भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय का प्रतीक है। इस दिन शस्त्र पूजन, शमी पूजन और शुभ कार्यों के आरंभ की परंपरा है।
विजयादशमी का संदेश बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अहंकार पर सदाचार की विजय है। मां दुर्गा की शक्ति और भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर यह पर्व धर्म, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देता है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई धार्मिक मान्यताओं, पूजन-विधि और तिथियों से संबंधित जानकारी विभिन्न पंचांगों एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। अष्टमी, नवमी, कन्या पूजन और व्रत पारण के समय में स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। श्रद्धालु पूजन से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से तिथि एवं शुभ मुहूर्त की पुष्टि अवश्य कर लें।