
जबलपुर। मध्यप्रदेश में बिजली लाइनों पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। बुरहानपुर में विद्युत दुर्घटना में कर्मचारी दर्शन चौधरी के गंभीर रूप से प्रभावित होने की जानकारी के बाद मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन ने बिजली कंपनियों से कार्यस्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। संगठन ने बिजली लाइनों, ट्रांसफार्मरों और सब स्टेशनों पर कार्यरत सभी तकनीकी कर्मचारियों का 20 लाख रुपये का बीमा कराने की मांग भी की है।
फेडरेशन के महामंत्री राकेश डीपी पाठक ने ऊर्जा सचिव, विद्युत कंपनियों के प्रबंध संचालकों और संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि नियमित कर्मचारियों के साथ संविदा और आउटसोर्स कर्मियों से भी निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन कराते हुए ही काम कराया जाना चाहिए। उन्होंने विद्युत दुर्घटनाओं की स्थिति में संबंधित कार्यस्थल के प्रभारी अधिकारी की भूमिका और उनके द्वारा दिए गए निर्देशों की जांच कराने की मांग भी रखी है।
सुरक्षा उपकरणों के बिना काम नहीं कराने की मांग
राकेश डीपी पाठक के मुताबिक, बिजली कर्मचारी विपरीत मौसम और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में दिन-रात अपनी सेवाएं देते हैं। कई बार उन्हें ऊंचे बिजली खंभों पर चढ़कर लाइनों की मरम्मत और सुधार का काम करना पड़ता है। ऐसे कार्यों के दौरान करंट लगने, ऊंचाई से गिरने और दूसरी दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। इन हादसों में कर्मचारियों की जान जाने के साथ उनके स्थायी रूप से दिव्यांग होने की आशंका भी रहती है।
फेडरेशन ने बिजली लाइनों पर काम करने वाले कर्मचारियों को मानक गुणवत्ता वाले सुरक्षा उपकरण तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की है। इनमें इंसुलेटेड टूल्स, सेफ्टी ग्लव्स, हेलमेट, इंसुलेटेड जूते, सेफ्टी बेल्ट, रिफ्लेक्टिव जैकेट, रेनकोट, गमबूट, फेस शील्ड और टॉर्च जैसे जरूरी उपकरण शामिल हैं।
वोल्टेज डिटेक्टर और अर्थिंग की व्यवस्था अनिवार्य हो
संगठन ने बिजली लाइनों पर काम शुरू करने से पहले वोल्टेज डिटेक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। इससे कर्मचारी यह जांच सकेंगे कि संबंधित लाइन में करंट मौजूद है या नहीं। फेडरेशन ने खंभों, बिजली लाइनों, ट्रांसफार्मरों और सब स्टेशनों पर काम करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत परमिट टू वर्क लेने और अनिवार्य अर्थिंग सहित सभी सुरक्षा उपायों का पालन करने की मांग की है।
फेडरेशन का कहना है कि बिजली लाइन का परमिट जारी करने और उसे निरस्त करने की प्रक्रिया में तालमेल की कमी भी दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है। इसलिए इस प्रक्रिया में स्पष्ट जिम्मेदारी तय करने के साथ पूरी सावधानी बरतना जरूरी है।
आउटसोर्स कर्मचारियों को सुरक्षा प्रशिक्षण देने पर जोर
फेडरेशन ने बिजली कंपनियों के साथ आउटसोर्स कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। संगठन के अनुसार, एजेंसियों को कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरणों के सही इस्तेमाल का विधिवत प्रशिक्षण देना चाहिए। संबंधित अधिकारियों को समय-समय पर औचक निरीक्षण कर यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कर्मचारी निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप काम कर रहे हैं।
राकेश डीपी पाठक ने कहा कि कर्मचारियों को सुरक्षित कार्यस्थल और जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना नियोक्ता की जिम्मेदारी है। फेडरेशन ने ऊर्जा विभाग और विद्युत कंपनियों के अधिकारियों से आग्रह किया है कि कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
अन्य पदाधिकारियों ने भी की हस्तक्षेप की मांग
कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़ी इन मांगों के समर्थन में फेडरेशन के एनके यादव, उमाशंकर मेहता, बीएस राठौर, मदन वर्मा, रामेश्वर गांगे, आरके कौशिक, अफसार अहमद सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।