
पन्ना। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक परंपराओं के निर्वहन की कड़ी में मंगलवार को खेजड़ा मंदिर में सदियों पुरानी परंपरा का विधिवत निर्वहन किया गया। मंदिर के पुजारी ने पन्ना नरेश महाराज छत्रसाल द्वितीय को वीरा एवं तलवार भेंट की। इस दौरान महाराज छत्रसाल के वंशज विक्रम सिंह बुंदेला, छतरपुर भी मौजूद रहे। परंपरागत आयोजन में वीरता, विजय और आध्यात्मिक चेतना से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों का स्मरण किया गया।
कार्यक्रम में मंचासीन संत शिरोमणि सदानंद जी महाराज, पंडित देवकरण त्रिपाठी, रूपराज शर्मा, ट्रस्ट अध्यक्ष महेश भाई पटेल, अमेरिका से आए मनु भाई पटेल, उपाध्यक्ष डीके दूबे और सचिव प्रेमकिशोर शर्मा सहित समाज के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

महमति प्राणनाथ जी के संदेशों पर डाला प्रकाश
कार्यक्रम में पंडित खेमराज जी ने अपने उद्बोधन में महमति प्राणनाथ जी की आध्यात्मिक महत्ता और उनके संदेशों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पन्ना की धरा ऐतिहासिक गौरव के साथ आध्यात्मिक चेतना की भी महत्वपूर्ण भूमि है। यहां की परंपराएं समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ आत्मजागरण, मानव कल्याण और सद्भाव का संदेश देती हैं।
उन्होंने महाराज छत्रसाल द्वितीय को विजय की तलवार भेंट करने की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि तलवार वीरता, साहस और विजय के संकल्प का प्रतीक रही है। ऐसी परंपराएं बुंदेलखंड के गौरवशाली इतिहास और पूर्वजों के शौर्य की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखती हैं।

नई पीढ़ी तक विरासत पहुंचाने पर जोर
मनु भाई पटेल ने कहा कि बुंदेलखंड की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करना तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। ऐसे आयोजन समाज को अपनी परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
खेजड़ा मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से पन्ना की ऐतिहासिक पहचान, महमति प्राणनाथ जी की आध्यात्मिक चेतना और महाराज छत्रसाल से जुड़ी परंपराओं का स्मरण किया गया।
रिपोर्ट: राकेश कुमार शर्मा