जबलपुर दशहरा जुलूस में गोविंदगंज रामलीला की झांकियों ने मोहा मन

ढाई दर्जन झांकियों में राष्ट्रभक्ति, धर्म परंपरा और समसामयिक मुद्दों का चित्रण

जबलपुर। संस्कारधानी की शाश्वत एवं गौरवशाली परंपरा के अनुरूप मुख्य दशहरा चल समारोह में एक बार फिर नयनाभिराम झांकियां देखने को मिलीं। दशहरा चल समारोह का नेतृत्व हमेशा की तरह श्री गोविंदगंज रामलीला ने किया। रामलीला के विशाल दशहरा चल समारोह के उपरांत विभिन्न समितियों द्वारा स्थापित मां जगदंबे की मनोहारी प्रतिमाएं चल रही थीं। सूर्यास्त से सूर्योदय तक शहर दशहरामय रहा। नगर के अलावा उपनगरीय क्षेत्रों और आसपास के ग्राम्यांचल से बड़ी संख्या में दर्शक दशहरा देखने आए। दूसरे शहरों से किसी कारणवश जबलपुर आए लोगों ने भी जाना कि संस्कारधानी का दशहरा देशभर में आखिर क्यों विख्यात है। पूरे उत्साह के साथ निकला भव्य एवं दिव्य चल समारोह यादगार बन गया।

गोविंदगंज रामलीला की झांकियों ने मन मोहा

गोविंदगंज रामलीला समिति की झांकियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। जन-जन के सवालों को सामने रखती झांकियों में यह दिखाया गया कि आखिर संसद क्यों नहीं चलने देते नेता और अनुकूल परिस्थितियों के बावजूद गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने में देरी क्यों हो रही है। एआई के सामने आते दुष्परिणाम, बच्चों में मोबाइल की लत, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध की विभीषिका, होर्मुज से जुड़ा वैश्विक तेल संकट, बख्सारावल सहित जनाक्रोश से जुड़े विषयों की झांकियों ने भी लोगों का ध्यान खींचा।

इसके साथ ही रावण-जटायु युद्ध, त्रिशूलधारी भगवान शंकर, कटकासुर और भगवान विष्णु के युद्ध सहित करीब ढाई दर्जन झांकियों ने श्रद्धा बिखेरी और कई सवाल भी खड़े किए।

राम-रावण युद्ध को दर्शकों ने सराहा

रामलीला जुलूस का मुख्य आकर्षण श्रीराम और रावण का युद्ध रहा। जुलूस के सबसे पीछे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, अनुज लक्ष्मण और महाबली हनुमानजी महाराज विराजमान थे। उनके ठीक सामने के रथ पर महाराज रावण दलबल के साथ विराजे थे। राम-रावण के बीच पूरे रास्ते युद्ध का प्रदर्शन किया गया। राम के तीर आकाश को छू रहे थे, तो वहीं रावण भी पूरी गर्जना के साथ रामजी से युद्ध कर रहा था।

राम के रूप में ओम दुबे, लक्ष्मण के रूप में मानस पांडे और हनुमानजी के रूप में पलाश पाठक जनाकर्षण और श्रद्धा का केंद्र रहे। वहीं, रावण के रूप में नगर के जाने-माने कलाविद पवन पांडे ने भी सबका ध्यान खींचा। रावण ने बच्चों को टॉफियां बांटीं। उत्साहित बच्चे “रावण अंकल, टॉफी दो” की आवाज लगाते रहे।

जगह-जगह हुआ भगवान का स्वागत

जुलूस में राम दरबार की झांकी का पूरे रास्ते स्वागत और पूजन-अर्चन किया गया। तीन पत्ती चौक पर महापौर जगत बहादुर अन्नू सहित जनप्रतिनिधियों ने नगर की ओर से भगवान का पूजन-अर्चन किया। इस अवसर पर विभिन्न जनप्रतिनिधि और नगर के प्रबुद्धजन शामिल रहे। कांग्रेस, भाजपा सहित विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधियों ने श्रद्धापूर्वक भगवान का पूजन किया।

विधायक अभिलाष पांडे, रामलीला समिति के अध्यक्ष अनिल तिवारी, संरक्षक रवि गुप्ता, राकेश डीपी पाठक, विजय सरावगी, अजय तिवारी, मनीष पाठक, महंत मोहन महाराज, पंडित रोहित महाराज, मंगू गोयल, कमल किशोर तिवारी, गुड्डा रैकवार, अमरनाथ रिछारिया, मुकेश पाठक, किशन अग्रवाल और पप्पू अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी जुलूस में शामिल रहे।

रामलीला का जुलूस छोटा फुहारा से प्रारंभ होकर दमोहनाका, बल्देव बाग, रानीताल और एमएलबी होते हुए तीन पत्ती पहुंचा, जहां वह मुख्य चल समारोह में शामिल हुआ। यहां से जुलूस मालवीय चौक, सराफा, लॉर्डगंज, फुहारा, कमानिया, सराफा, कोतवाली, मिलौनीगंज, घोड़ा नक्कास और हनुमानताल होते हुए वापस छोटा फुहारा पहुंचा। यहां रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों का दहन किया गया। इसके बाद रामलीला मंच पर रावण मरण की लीला हुई।

दिखी राष्ट्रभक्ति और धर्म परंपरा

गोविंदगंज रामलीला समिति ने अपनी पहचान के अनुरूप सुंदर झांकियों को चल समारोह में शामिल किया। इनमें राष्ट्रभक्ति, राष्ट्र स्वाभिमान और धर्म परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक, बैंड वादन, आकर्षक ढोल, रथ, हाथी-घोड़े और दुलदुल घोड़ी सहित दशहरा चल समारोह की पारंपरिक झलक देखने को मिली।

रामलीला का दशहरा चल समारोह शाम चार बजे छोटा फुहारा से शुरू हुआ। सबसे आगे रावण, मेघनाद और कुंभकरण के विशालकाय पुतले थे। उनके पीछे आकर्षक झांकियां और फिर राम-रावण का दर्शनीय दिव्य दरबार था।