
जबलपुर। हनुमान जी हमें सिखाते हैं कि जीवन में केवल बड़ा बनना पर्याप्त नहीं, बल्कि सही समय पर छोटा बनना भी आना चाहिए। यह उद्गार परमहंस स्वामी गिरीशानंद सरस्वती जी महाराज ने कटंगा स्थित विंध्य भवन, जबलपुर में 21 से 25 अक्टूबर तक आयोजित हनुमत चरित्र प्रवचन सत्र के दूसरे दिन व्यक्त किए।

महाराज जी ने कहा कि जब मनुष्य अपने सामर्थ्य को भूल जाता है, तब उसे उसकी शक्ति का स्मरण कराना आवश्यक होता है। शांति की तलाश का अर्थ जीवन में बार-बार उठने वाली समस्याओं के समाधान की खोज करना है। व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और राजनीतिक समस्याएं शांति को प्रभावित करती हैं। ये व्यक्ति, समाज और शासन व्यवस्था को अशांत करती हैं तथा संघर्ष की परिस्थितियां पैदा करती हैं।
उन्होंने कहा कि समस्याएं मनुष्य द्वारा सदियों में अर्जित मानवीय मूल्यों को भी नष्ट कर सकती हैं। इसलिए शांति रूपी सीता की खोज एक व्यापक अवधारणा है। यह खो गई धरती की बेटी की खोज के साथ-साथ जमीनी सच्चाई को तलाशने का भी प्रतीक है।

विवेक, विनम्रता और धैर्य से मिलता है समाधान
स्वामी गिरीशानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि हर समस्या का समाधान शक्ति के माध्यम से नहीं किया जा सकता। कुछ समस्याएं विवेक से हल होती हैं, कुछ के लिए विनम्रता की आवश्यकता होती है, तो कुछ का समाधान धैर्य से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि आज संसार में विवाद बढ़ने का एक कारण यह भी है कि लोग हर परिस्थिति में अपनी बात मनवाना चाहते हैं। ऐसे में हनुमान जी का चरित्र हमें सिखाता है कि बुद्धिमान वह नहीं है, जो हर किसी को पराजित कर दे, बल्कि बुद्धिमान वह है, जो अपने लक्ष्य तक पहुंचने का उचित मार्ग खोज ले।
गणमान्य नागरिकों ने किया पूजन
प्रवचन सत्र के दौरान प्रभु श्री रामभद्र सरकार एवं स्वामी गिरीशानंद सरस्वती जी महाराज का पूजन न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, पूर्व मुख्य न्यायाधीश रविशंकर झा, विधायक अशोक रोहाणी, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, नगर निगम अध्यक्ष रिंकू ब्रिज, डॉ. राजेश धीरावाणी, सीए अखिलेश जैन, एच.एन. मिश्रा, ए.पी. शुक्ला, विजय गुप्ता, रुचि मोहन, तनुश्री सिंह, बी.एस. परिहार, भरत परिहार, अशोक रंगा, रोशनी अग्रवाल, भानू नवेरिया सहित अन्य गणमान्य नागरिकों ने किया।
पूजन पंडित रोहित दुबे ने संपन्न कराया, जबकि कार्यक्रम का संचालन पंडित सौरभ दुबे ने किया।