गणेश चतुर्थी 2025: लंबे समय बाद बन रहे कई शुभ संयोग, जानें पूजा मुहूर्त और महत्व

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाने वाली गणेश चतुर्थी इस बार खास होने वाली है। लंबे समय बाद कई शुभ संयोग बन रहे हैं। 11 दिवसीय गणेशोत्सव 27 अगस्त से प्रारंभ होगा। इस दिन गणेश भगवान के बाल रूप का पूजन किया जाता है। गणेश जी को विघ्नहर्ता और प्रथम पूजनीय माना जाता है। मान्यता है कि देवी पार्वती ने इसी दिन भगवान गणेश को जन्म दिया था और उनका जन्म दोपहर में हुआ था, इसलिए गणेश चतुर्थी की पूजा हमेशा मध्याह्न के मुहूर्त में की जाती है।

ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व

ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद् पंडित सौरभ दुबे के अनुसार इस बार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति से शुभ एवं शुक्ल योग और रवियोग बन रहे हैं। इस शुभ स्थिति में गणेश प्रतिमा की स्थापना करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। पंडित दुबे ने बताया कि 27 अगस्त को गणेश प्रतिमाओं की स्थापना चित्रा नक्षत्र में की जाएगी। मंगल के इस नक्षत्र में चंद्रमा होने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।

तिथियां और नक्षत्र

गणेश चतुर्थी का पर्व इस बार 26 अगस्त दोपहर 12:22 बजे से प्रारंभ होकर 27 अगस्त दोपहर 1:47 बजे तक रहेगा। 27 अगस्त को पूरे दिन चित्रा नक्षत्र रहेगा। चित्रा नक्षत्र और चतुर्थी तिथि का यह संयोग इस उत्सव को और भी शुभ बना रहा है।

गणेश प्रतिमा स्थापना का शुभ मुहूर्त

गणपति की पूजा दोपहर के समय करना सबसे शुभ माना गया है क्योंकि इसी समय भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इस वर्ष मध्याह्न काल में अभिजित मुहूर्त का विशेष संयोग रहेगा।

  • अभिजित मुहूर्त: प्रातः 11:40 से दोपहर 12:50 तक
  • अन्य शुभ मुहूर्त: सुबह 7:11 से 9:22 तक, सुबह 9:36 से 12:02 तक, दोपहर 1:39 से 3:26 तक, शाम 4:45 से रात 7:28 तक।

पंडित दुबे के अनुसार पूरे दिन शुभ संयोग बने रहेंगे, इसलिए सुविधा अनुसार किसी भी शुभ लग्न या चौघड़िया मुहूर्त में गणेश प्रतिमा की स्थापना की जा सकती है। इस बार गणेश चतुर्थी पर ग्रहों और सितारों का ऐसा संयोग बन रहा है जिससे उत्सव का महत्व और भी बढ़ गया है।

 

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