
राजीव उपाध्याय
मध्यप्रदेश कांग्रेस में दिग्गजों के बीच गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। यह बरसों से चलती आ रही है लेकिन इस हद तक पहुंच जाए कि आपसी ईगो इतना बढ़ जाए कि चुनी हुई सरकार को गिरा दिया जाए तो यह ईगो की पराकाष्ठा है। कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने केवल अपना ईगो देखा लेकिन कार्यकर्ताओं की मेहनत का क्या, जो उन्होंने पार्टी को चुनाव जिताने में लगाई। 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में 2018 में आई लेकिन 15 माह बाद ही धराशायी हो गई। सरकार गिरने के पांच वर्ष पांच माह बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता सच्चाई बयान कर रहे हैं कि इसका जिम्मेदार कौन है। कार्यकर्ता आपस में चर्चा कर रहे हैं हमने तो पूरी मेहनत करके सरकार बनाई लेकिन बड़ों के द्वंद्व से सरकार बच नहीं पाई।
महाराजा के हाथ में ऐसा क्या जादू
ज्योतिरादित्य सिंधिया जिन्हें महाराजा कहा जाता है उनके हाथ में ऐसा क्या जादू है कि एक कार्यक्रम में अपना हाथ जैसे ही उन्होंने दिग्विजय सिंह के हाथ में दिया और उन्हें मंच तक ले गए तो दिग्विजय सिंह को अचानक सिंधिया के प्रति अथाह प्रेम उमड़ पड़ा। उस कार्यक्रम के कुछ सप्ताह बाद एक पॉडकास्ट में वे बता रहे हैं कि कांग्रेस सरकार में सिंधिया की उपेक्षा हो रही थी। यही कारण था कि सरकार गिरी। वहीं कमल नाथ ने एक्स पर ट्वीट किया कि सिंधिया को भ्रम था कि सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं।
कार्यकर्ताओं ने पूरी मेहनत की
इस मामले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने तो पूरी मेहनत करके सरकार बनाई। 15 साल बाद कांग्रेस की सरकार आने पर वे खुश थे लेकिन सरकार नहीं चल सकी। यदि तीनों दिग्गज कमल नाथ, दिग्विजय और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच कोई आपसी मतभेद था तो उसे दूर किया जाना चाहिए था। इसकी परिणिती सरकार की आहूति देकर तो नहीं हो सकती थी। यदि सिंधिया को यह भ्रम था कि सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं तो उसे दूर किया जाना चाहिए था। सिंधिया जो चाहते थे वह क्या इतना बड़ा मसला था कि अलाकमान से भी हल नहीं हो सका।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार बनाने में कार्यकर्ताओं ने बहुत मेहनत की, जमीनी स्तर पर बहुत काम किया लेकिन बड़ों की ईगो ने सब खत्म कर दिया।