
जबलपुर। शहर के रतननगर में स्थित भगवान सुप्तेश्वर का मंदिर लोगों की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है। गणेश चतुर्थी से लेकर चतुर्दशी तक यहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान गणेश उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। खास बात यह है कि यहां 41 दिन तक लगातार दर्शन और दीपक लगाने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि जो भक्त लगातार 41 दिन यहां दर्शन पूजन करता है, उसकी मनोकामना भगवान गणेश अवश्य पूरी करते हैं।
सपने के माध्यम से हुई प्रतिमा की स्थापना
पूजा पाठ समिति के पंकज वैद्य ने बताया कि यह प्रतिमा स्वयंभू है। वर्ष 1989 में महाराष्ट्रियन महिला सुधा राजे को बार-बार सपनों में संकेत मिला कि भगवान यहां स्थापित होना चाहते हैं। सपनों में ही उन्हें स्थान बताया गया जिसके बाद उन्होंने विधिवत स्थापना कराई। प्रतिमा 25 फीट ऊंची और 100 फीट गहरी है। इसके साथ ही मंदिर में भगवान शंकर, महाकाली, महासस्वती और महालक्ष्मी की भी स्वयंभू प्रतिमाएं हैं।
41 दिन दर्शन का महत्व
एकता विहार कॉलोनी निवासी मंजू पटेल ने बताया कि यहां 41 दिन लगातार दर्शन और दीया जलाने का विशेष महत्व है। भक्तों का विश्वास है कि भगवान गणेश हर मनोकामना पूरी करते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह गणेश जी कलकी अवतार हैं। यह प्रतिमा गर्दन के रूप में दिखाई देती है जबकि पूरा स्वरूप घोड़े पर सवार है और जमीन में दबा हुआ है। यहां तक कि दूर प्रदेशों में रहने वाले भक्त भी भगवान की फोटो रखकर पूजा करते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
श्रद्धालुओं के अनुभव
कुसुम जोशी ने बताया कि एक श्रद्धालु ने यूट्यूब से भगवान सुप्तेश्वर के बारे में जानकारी प्राप्त की और उनकी फोटो निकालकर 41 दिन दीपक जलाकर प्रार्थना की, जिससे उसकी मनोकामना पूरी हुई। इसके बाद वह भक्त मंदिर पहुंचे और भगवान की महिमा का बखान किया। इसी कारण इन्हें सुप्तेश्वर कहा जाता है, क्योंकि ये सपनों में आकर स्थापित हुए और सोए हुए भक्तों को जगाते हैं।
दिलीप सप्रे ने बताया कि वे हर चतुर्थी को यहां आते हैं और उन्हें शांति की अनुभूति होती है। शिल्पा सप्रे ने कहा कि जब भी उन्हें कोई समस्या आई, भगवान सुप्तेश्वर गणेश के स्मरण मात्र से संकट दूर हो गए। विभु चौधरी ने बताया कि उनका भगवान से गहरा विश्वास है और उन्होंने युवाओं से भी सनातन संस्कृति व परंपराओं को अपनाने की अपील की। पुष्ककल चौधरी ने साझा किया कि केदारनाथ यात्रा के दौरान उनकी तबीयत खराब हो गई थी, तब उन्होंने भगवान से प्रार्थना की और चमत्कारिक रूप से वे स्वस्थ होकर लौटे तथा आकर भगवान सुप्तेश्वर के दर्शन किए।