
जबलपुर। “मेरे बच्चे नहीं हैं तो क्या हुआ मेरे शरीर से बच्चों को ट्रेनिंग मिलना चाहिए। मेरे निधन के बाद मेरे शरीर को मेडिकल कॉलेज जबलपुर को दे देना”। यह इच्छा अनिल काले ने अपनी धर्मपत्नी नीना काले से कही थी। उनकी इच्छा का सम्मान उनकी पत्नी ने रखते हुए अपने पति अनिल काले की देह नेताजी सुभाषंचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के एनाटामी विभाग को दान की।
दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर
नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के एनाटामी विभाग के अध्यक्ष डॉ नटवर सिंह ने बताया कि स्व अनिल काले की देह दान की इच्छा को उनकी पत्नी नीना काले ने पूरा किया। मेडिकल कॉलेज के एनाटामी विभाग में उनको गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। देहदान में डा जितेंद्र जामदार और मेडिकल कॉलेज जबलपुर के एनाटामी विभाग के डॉ. नटवर सिंह, विध्येश भापकर ने सहयोग किया।
सादगी पूर्ण जीवन जिया, कार्य के प्रति रहे समर्पित
जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में लिपिक, वृंदावन कालोनी गंगा मैया इंदा नगर रांझी निवासी 55 वर्षीय अनिल काले का ह्रदयघात हो जाने से निधन हो गया। श्रीकांत काले के छोटे भाई, विध्येश भापकर के जीजा जी थे। अनिल काले जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में कार्यरत थे। आप बहुत ही सरल, सहृदय एवं अपने कार्य के लिए सदा समर्पित रहे। वर्तमान में वे चीफ वार्डन ऑफिस, JEC, का कार्य देख रहे थे।
अनिल काले की दिनचर्या बहुत ही संयमित और संस्कारों से युक्त रही, ब्रम्ह मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर वे पूजन अर्चन, आरती, रामचरित मानस पाठ करते थे। वे रामायण सुन्दरकाण्ड पाठ पूरे कालोनी में घर घर जाकर करते थे। सुबह नियमित रूप से आफिस पहुंच कर सबको राम राम करते, योग, शाकाहार और संस्कारों के साथ संयमित जीवन जी रहे थे। उनको बच्चों से बड़ा प्रेम था।
पति पत्नी सामंजस्य के साथ कालोनी, कालेज स्टाफ और समाज में सभी से राधे राधे बोलना और सबके हाल चाल जानना उनके दैनिक दिनचर्या थी।