
राजीव उपाध्याय
आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआइ) डॉक्टर्स के लिए नई समस्या बन गई है। इसके बिना भविष्य में प्रेक्टिस करना उनके लिए संभव ही नहीं होगा। नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआइ इंपैक्ट समिट 2026 की सफलता के बाद डॉक्टर्स और उनके ग्रुप में यह चर्चा है कि किस तरह से “एआइ” उनके प्रोफेशन में खुद विशेषज्ञता के साथ डॉक्टर बनकर आ गया है और डॉक्टर्स को एआइ के बारे में सीखने के लिए बाध्य कर दिया है क्योंकि एआइ हर तरह की जांच कर सकता है, रिपोर्ट पढ़ सकता है। इससे डॉक्टर अब इसकी नब्ज अपने कंट्रोल में रखने इसे सीख रहे हैं।
कहीं खुद डॉक्टर न बन जाए
मेडिकल फील्ड में यह चर्चा है कि “एआइ” कहीं डॉक्टर्स फैकल्टी को रिप्लेस तो नहीं कर देगा। हालांकि वे यह भी मानते हैं कि “एआइ” को खुद डॉक्टर नहीं बनने देना है बल्कि असिस्टेंट के रूप में इसका उपयोग करेंगे। “एआइ” की तैयार रिपोर्ट को एक्सपर्ट डॉक्टर खुद चेक करके यदि कहीं खामी दिखती है तो “एआइ” से दोबारा रिपोर्ट को तैयार करने कह सकता है क्योंकि “एआइ” फीडिंग डाटा के अनुसार और प्रोबेबिलिटी के अनुसार रिपोर्ट तैयार करता है इस रिपोर्ट पर सवाल वही डॉक्टर उठा सकते हैं जिन्होंने पूरी तरह से एआइ पर महारत हासिल की हो। तभी डॉक्टर एआइ पर कंट्रोल करके असिस्टेंट के रूप में उससे काम ले सकते हैं।
ये कर सकता है “एआइ”
“एआइ” मेडिकल फील्ड में पूर्वानुमान व रिसर्च के लिए अच्छा टूल है। यह मरीज की रिपोर्ट देखकर भविष्य में इलाज की संभावना को बता सकता है व बीमारी की गंभीरता को बता सकता है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के पीड्रियाट्रिक विभाग के अध्यक्ष व एआइ में रिसर्च एंड डेटा एनालिसिस के नेशनल ट्रेनर डॉ विकेश अग्रवाल का कहना है कि रिसर्च में एआइ का अच्छा उपयोग है। खासतौर से जैनेटिक एनालिसिस, जीनोम सिक्वेंसी में “एआइ” का अच्छा उपयोग हो सकता है। डीएनए एनालिसिस की रिर्पोटिंग आसान कर सकता है। “एआइ” डॉक्टर्स को रिप्लेस नहीं कर सकता है।
“एआइ” से डाटा प्रेडिक्शन से जरूरत के टेस्ट किए जा सकते हैं। “एआइ” से मरीज खुद अपना इलाज नहीं कर सकता। डॉक्टर ही मरीज का इलाज कर सकता है, यह असिस्टेंट के रूप में डॉक्टर का सहायक हो सकता है। सर्जरी, रेडियोलॉजी में इसका अच्छा उपयोग है। डॉ विकेश अग्रवाल का कहना है कि पब्लिक हेल्थ में यह उपयोगी साबित होगा। हर राज्य में बीमारी के अनुसार डिजिटल डाटा उपलब्ध करा सकता है। इससे सरकार वहां उस डाटा के अनुसार बजट का आबंटन कर सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी है वहां इसका उपयोग किया जा सकेगा। “एआइ” पर डॉक्टर्स को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। “एआइ” डॉक्टरों के लिए समस्या नहीं होगा बल्कि उनके लिए यह अच्छा असिस्टेंट होगा। भविष्य के हॉस्पिटल “एआइ हॉस्पिटल” हैं।
रेडियोलॉजी में “एआइ” का बेहतर उपयोग
“एआइ” का रेडियोलाजी में बेहतर उपयोग संभव है। आइआरआइए (इंडियन रेडिलॉजिकल एंड इमेजिन एसोसिएशन) के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ अरविंद जैन के अनुसार “एआइ” रेडियोलॉजी में एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआइ की रिपोर्ट तैयार कर सकता है। वह इन रिपोर्ट को अधिक गहराई तक पढ़ सकता है। इससे किसी भी बीमारी के बारे में अधिक गहराई से समझा जा सकता है। लेकिन “एआइ” का उपयोग असिस्टेंट के रूप में किया जा सकता है।
प्रशिक्षण दिया जा रहा
डॉक्टर्स के सेमिनार व सीएमइ में “एआइ” का रेडियोलॉजी में उपयोग के बारे में प्रशिक्षण भी आयोजित किए जा रहे हैं। जिसमें बताया जा रहा है कि किस तरह से “एआइ” एक्सरे, सीटी स्कैन एमआरआइ की फिल्म को पढ़ लेता है। भविष्य में एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) मेडिकल छात्रों के लिए “एआइ” का कोर्स भी शुरु कर सकता है।
फर्जी प्रिस्क्रिप्शन से जन स्वास्थ्य को खतरा
ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट (एआइओसीडी) नई दिल्ली, ने एआइ के दुरुपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एआइओसीडी के महासचिव राजीव सिंघल ने बताया कि इसका दुरुपयोग भी किया जा रहा है। कुछ काल्पनिक अस्पतालों के नाम एवं मनगढ़ंत विवरणों वाले एआइ जनित प्रिस्क्रिप्शन कुछ ऑनलाइन प्लेटफार्म द्वारा स्वीकार किए जा रहे हैं।
यह ड्रग्स एंड कास्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों को दरकिनार कर रहे हैं। इस पर रोक जरूरी है। इस मामले में एआइओसीडी ने केंद्र सरकार और डीसीजीआइ को पत्र भी लिखकर इस तरह के प्रिस्क्रिप्शन को अवैध घोषित करने की मांग की है।