मौन में मिली मन की शांति, एडवांस मेडिटेशन ने दिया आत्मचिंतन का अनुभव, देखें वीडियो

आर्ट ऑफ लिविंग जबलपुर में एडवांस मेडिटेशन प्रोग्राम का समापन, प्रतिभागियों ने साझा किए अनुभव

जबलपुर। आर्ट ऑफ लिविंग जबलपुर के मदन महल स्थित ज्ञान क्षेत्र में आयोजित चार दिवसीय एडवांस मेडिटेशन प्रोग्राम का सोमवार को समापन हुआ। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने मौन साधना, ध्यान, योग और प्राणायाम के माध्यम से आंतरिक शांति एवं आत्मिक अनुभव की दिशा में आगे बढ़ने का अभ्यास किया। वरिष्ठ शिक्षक प्रशांत असाटी ने चार दिनों के दौरान साधना की विभिन्न प्रक्रियाओं और उनके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके पूर्व प्रतिभागियों ने शनिवार और रविवार शाम नेचर वॉक भी किया।

मौन साधना से भीतर की ओर बढ़ने का अवसर

वरिष्ठ शिक्षक प्रशांत असाटी ने बताया कि एडवांस मेडिटेशन प्रोग्राम केवल ध्यान करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि व्यक्ति को कुछ समय के लिए बाहरी गतिविधियों से स्वयं को अलग कर अपने भीतर की यात्रा करने का अवसर देता है। मौन साधना के माध्यम से मन को अनावश्यक विचारों और बाहरी प्रभावों से विराम मिलता है। नियमित ध्यान से व्यक्ति अपनी भावनाओं और विचारों को अधिक स्पष्टता से समझने लगता है तथा मानसिक स्थिरता और सहजता का अनुभव कर सकता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लगातार बढ़ती व्यस्तता, तनाव और मानसिक दबाव के बीच कुछ समय स्वयं के लिए निकालना आवश्यक है। एडवांस मेडिटेशन में ध्यान और मौन के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर मौजूद शांति और ऊर्जा से जुड़ने का प्रयास करता है। साधना की निरंतरता से एकाग्रता, सजगता और सकारात्मक दृष्टिकोण को विकसित करने में सहायता मिल सकती है।

सुदर्शन क्रिया प्राणायाम का भी अभ्यास

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को सुदर्शन क्रिया प्राणायाम के बारे में भी जानकारी दी गई और इसके अभ्यास से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझाया गया। श्री असाटी ने बताया कि श्वास और मन का आपस में गहरा संबंध है। श्वास के प्रति सजगता और प्राणायाम के अभ्यास के माध्यम से व्यक्ति अपने मन को शांत और संतुलित रखने की दिशा में प्रयास कर सकता है। उन्होंने साधना को नियमित जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।

प्रतिभागियों ने साझा किए साधना के अनुभव

समापन अवसर पर शिक्षक जय दुबे ने कहा कि इस कोर्स के माध्‍यम से कई महत्‍वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी मिली। प्रशांत भैया ने बहुत ही व्‍यवस्थित तरीके से कोर्स कराया, जिससे साधकों को नई ऊर्जा मिली।

राकेश श्रीवास ने बताया कि मौन साधना के दौरान बाहरी गतिविधियों से दूरी बनाने पर अपने विचारों और भावनाओं को समझने का अवसर मिला। उन्होंने एडवांस मेडिटेशन को आत्मचिंतन की दृष्टि से उपयोगी अनुभव बताया।

सुनीता भदोरिया ने कहा कि ध्यान और योग के अभ्यास से उन्हें भीतर की शांति को महसूस करने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि साधना के दौरान स्वयं पर ध्यान केंद्रित करने का अनुभव उनके लिए विशेष रहा।

सुनील मघरानी ने कार्यक्रम के दौरान सीखी गई साधना प्रक्रियाओं को नियमित जीवन में अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि व्यस्त दिनचर्या के बीच ध्यान के लिए समय निकालना व्यक्ति को स्वयं से जोड़ने में मदद करता है।

गौरी कनक ने अपने अनुभव में मौन और ध्यान के दौरान मिली सहजता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम ने उन्हें अपने भीतर झांकने और मन को शांत रखने की दिशा में प्रेरित किया।

तरुण रावत ने कहा कि एडवांस मेडिटेशन प्रोग्राम के दौरान ध्यान और प्राणायाम के अभ्यास को गहराई से समझने का अवसर मिला। उन्होंने इसे मानसिक और आध्यात्मिक विकास की दिशा में उपयोगी अनुभव बताया।

विनोद पांडे ने कार्यक्रम के अनुभव साझा करते हुए कहा कि चार दिनों की साधना ने उन्हें नियमित ध्यान के महत्व को समझने का अवसर दिया। उन्होंने साधना से प्राप्त अनुभवों को जीवन में आगे भी जारी रखने की इच्छा व्यक्त की।

आभार प्रदर्शन के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंत में शिक्षक ऋतुराज असाटी ने सभी प्रतिभागियों, शिक्षकों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि साधना का वास्तविक लाभ तभी प्राप्त होता है, जब सीखी गई प्रक्रियाओं को नियमित जीवन का हिस्सा बनाया जाए। चार दिवसीय एडवांस मेडिटेशन प्रोग्राम का समापन सकारात्मक ऊर्जा और साधना को निरंतर जारी रखने के संकल्प के साथ हुआ। कार्यक्रम के दौरान नवीन बरसैंया, डॉ. शोभना बिलैया, भूमिका पटेल, अमित श्रीवास्‍तव, मानसी तिवारी, श्‍याम लाल सहित बड़ी संख्‍या में लोग मौजूद रहे।