
अयोध्या में 25 नवंबर मंगलवार को राममंदिर पर धर्मध्वाजा फहराई गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये गुलामी की मानसिकता ही है, जिसने इतने वर्षों तक रामत्व को नकारा है। भगवान राम, अपने आप में एक वैल्यू सिस्टम हैं। भारत के हर घर में, हर भारतीय के मन में, और भारतवर्ष के हर कण-कण में राम हैं। लेकिन गुलामी की मानसिकता इतनी हावी हो गई कि प्रभु राम को भी काल्पनिक घोषित किया जाने लगा। पीएम मोदी ने कहा कि अगर हम ठान लें, अगले दस साल में मानसिक गुलामी से पूरी तरह मुक्ति पा लेंगे, और तब, ऐसा आत्मविश्वास बढ़ेगा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना पूरा होने से भारत को कोई रोक नहीं पाएगा।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास उपस्थित थे।

यह भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज
ये धर्म ध्वजा केवल एक ध्वजा नहीं, ये भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है। इसका भगवा रंग, इस पर रचित सूर्यवंश की ख्याति, वर्णित ओम् शब्द और अंकित कोविदार वृक्ष रामराज्य की कीर्ति को प्रतिरूपित करता है। आने वाली सदियों और सहस्र-शताब्दियों तक, ये धर्मध्वज प्रभु राम के आदर्शों और सिद्धांतों का उद्घोष करेगा। ये धर्मध्वज आह्वान करेगा- सत्यमेव जयते नानृतं! यानी, जीत सत्य की ही होती है, असत्य की नहीं। ये धर्मध्वज भी इस मंदिर के ध्येय का प्रतीक है। ये ध्वज दूर से ही रामलला की जन्मभूमि के दर्शन कराएगा। और, युगों-युगों तक प्रभु श्रीराम के आदेशों और प्रेरणाओं को मानव मात्र तक पहुंचाएगा।
रामभक्तों के लिए अविस्मरणीय क्षण
पीएम मोदी ने कहा कि मैं सम्पूर्ण विश्व के करोड़ों रामभक्तों को इस अविस्मरणीय क्षण की, इस अद्वितीय अवसर की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। मैं आज उन सभी भक्तों को भी प्रणाम करता हूं, हर उस दानवीर का भी आभार व्यक्त करता हूं, जिसने राम मंदिर निर्माण के लिए अपना सहयोग दिया। मैं राम मंदिर के निर्माण से जुड़े हर श्रमवीर, हर कारीगर, हर योजनाकार, हर वास्तुकार, सभी का अभिनंदन करता हूं।
2047 तक विकसित भारत का निर्माण
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में, महिला, दलित, पिछड़े, अति-पिछड़े, आदिवासी, वंचित, किसान, श्रमिक, युवा, हर वर्ग को विकास के केंद्र में रखा गया है। जब देश का हर व्यक्ति, हर वर्ग, हर क्षेत्र सशक्त होगा, तब संकल्प की सिद्धि में सबका प्रयास लगेगा। और सबके प्रयास से ही 2047, जब देश आज़ादी के 100 साल मनाएगा, हमें 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करना ही होगा।
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक अवसर पर, मैंने राम से राष्ट्र के संकल्प की चर्चा की थी। मैंने कहा था कि हमें आने वाले एक हज़ार वर्षों के लिए भारत की नींव मज़बूत करनी है। हमें याद रखना है, जो सिर्फ वर्तमान का सोचते हैं, वो आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय करते हैं। हमें वर्तमान के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के बारे में भी सोचना है। अगर भारत को साल 2047 तक विकसित बनाना है, अगर समाज को सामर्थ्यवान बनाना है, तो हमें अपने भीतर “राम” को जगाना होगा। हमें अपने भीतर के राम की प्राण प्रतिष्ठा करनी होगी, और इस संकल्प के लिए आज से बेहतर दिन और क्या हो सकता है?
आज ऐतिहासिक दिन
पीएम मोदी ने कहा कि 25 नवंबर का ये ऐतिहासिक दिन अपनी विरासत पर गर्व का एक और अद्भुत क्षण लेकर आया है। इसकी वजह है, धर्मधव्जा पर अंकित- कोविदार वृक्ष। ये कोविदार वृक्ष इस बात का उदाहरण है कि जब हम अपनी जड़ों से कट जाते हैं, तो हमारा वैभव इतिहास के पन्नों में दब जाता है।
आजादी से मुक्ति मिली, हीन भावना से नहीं
पीएम मोदी ने कहा कि सबसे बड़ा दुर्भाग्य ये है कि मैकाले ने जो कुछ सोचा था, उसका प्रभाव कहीं व्यापक हुआ। हमें आज़ादी मिली, लेकिन हीन भावना से मुक्ति नहीं मिली। हमारे यहां एक विकार आ गया कि विदेश की हर चीज़, हर व्यवस्था अच्छी है, और जो हमारी अपनी चीजें हैं, उनमें खोट ही खोट है। गुलामी की यही मानसिकता है, जिसने लगातार ये स्थापित किया, हमने विदेशों से लोकतंत्र लिया, कहा गया कि हमारा संविधान भी विदेश से प्रेरित है, जबकि सच ये है कि भारत लोकतंत्र की जननी है।
अयोध्या लगातार संवर रहा
पीएम मोदी ने कहा कि अयोध्या धाम में रामलला का मंदिर परिसर भव्य से भव्यतम हो रहा है, और साथ ही अयोध्या को संवारने का काम लगातार जारी है। आज अयोध्या फिर से वह नगरी बन रही है, जो दुनिया के लिए उदाहरण बनेगी। त्रेता युग की अयोध्या ने मानवता को नीति दी, 21वीं सदी की अयोध्या मानवता को विकास का नया मॉडल दे रही है। तब अयोध्या मर्यादा का केंद्र थी, अब अयोध्या विकसित भारत का मेरुदंड बनकर उभर रही है। भविष्य की अयोध्या में पौराणिकता और नूतनता का संगम होगा।
सरयू जी की अमृत धारा और विकास की धारा, एक साथ बहेंगी। यहां आध्यात्म और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, दोनों का तालमेल दिखेगा। राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ से नई अयोध्या के दर्शन होते हैं। अयोध्या में भव्य एयरपोर्ट है, अयोध्या में आज शानदार रेलवे स्टेशन है। वंदे भारत और अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें अयोध्या को बाकी देश से जोड़ रही हैं। अयोध्या वासियों को सुविधाएं मिलें, उनके जीवन में समृद्धि आए, इसके लिए निरंतर काम चल रहा है।
लगातार आ रहे श्रद्धालु
पीएम मोदी ने कहा कि जब से प्राण प्रतिष्ठा हुई है, तब से लेकर आज तक करीब-करीब पैंतालीस करोड़ श्रद्धालु, यहां दर्शन के लिए आ चुके हैं। ये वो पवित्र भूमि है, जहां पैंतालीस करोड़ लोगों के चरण रज पड़े हैं। और इससे अयोध्या और आसपास के लोगों की आय में आर्थिक परिवर्तन आया है, वृद्धि हुई है। कभी अयोध्या विकास के पैमानों में बहुत पीछे थी, आज अयोध्या नगरी यूपी के अग्रणी शहरों में से एक बन रही है।
भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्था
पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का आने वाला समय बहुत महत्वपूर्ण है। आजादी के बाद के 70 साल में भारत, 70 साल में भारत विश्व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना, 70 साल में 11वीं। लेकिन पिछले 11 साल में ही भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। और वो दिन दूर नहीं, जब भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन जाएगा। आने वाला समय नए अवसरों का है, नई संभावनाओं का है। और इस अहम कालखंड में भी भगवान राम के विचार ही हमारी प्रेरणा बनेंगे।