
नई दिल्ली। भोपाल मध्यप्रदेश, जोधपुर राजस्थान, अहमदाबाद गुजरात, पटना बिहार, लखनऊ, बरेली उत्तरप्रदेश, रायपुर छत्तीसगढ़, देहरादून उत्तराखण्ड समेत देशभर के आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा, सोवा-रिग्पा एएसयूएस मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग पर अब पूरी तरह से रोक लगाई जाएगी। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) नईदिल्ली के एंटी रैगिंग सेल के नोडल ऑफीसर डॉ. अतुल बी वार्ष्णेय द्वारा आदेश पत्र जारी किया गया है। यूजीसी के निर्देशों को भी पत्र में शामिल किया गया है। यह जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से आयुष एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पांडेय ने दी।
डॉ. पांडेय ने बताया कि अब कॉलेज व हॉस्पिटल परिसर न केवल रैगिंग मुक्त होंगे, बल्कि संस्थानों को अपने प्रॉस्पेक्टस, सूचना पुस्तिकाओं व ब्रोशरों में एंटी रैगिंग चेतावनी प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। साथ ही एंटी रैगिंग स्क्वॉड का गठन, संस्था की वेबसाइट पर समिति व नोडल अधिकारी की जानकारी और संपर्क नंबर देना भी जरूरी होगा। छात्र व अभिभावकों से अंडरटेकिंग ली जाएगी।
अब नए छात्रों को रंग, नस्ल, धर्म, जाति, लिंग (ट्रांसजेंडर सहित), राष्ट्रीयता, क्षेत्रीय मूल, भाषाई पहचान, जन्म, निवास स्थान या आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर किसी प्रकार के शारीरिक या मानसिक दुर्व्यवहार का सामना नहीं करना पड़ेगा।
रैगिंग अपराध की श्रेणी में
डॉ. राकेश पांडेय ने कहा कि रैगिंग लेना एक अपराध की श्रेणी में आता है। छात्रों में रैगिंग के विरोध में जागरूकता बढ़ाने के लिए नियमित बातचीत, कार्यशालाएं और सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। एनसीआईएसएम ने स्पष्ट किया है कि शिकायतकर्ताओं की गोपनीयता बरकरार रखी जाएगी। देशभर में 700 से अधिक एएसयूएस मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। संस्थानों में आवश्यक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों की मौजूदगी रैगिंग पर नियंत्रण में मदद करेगी।
सौ फीसदी रैगिंग मुक्त परिसर की उम्मीद
एनसीआईएसएम नईदिल्ली के निर्देशों से संभावना जताई जा रही है कि अब सभी आयुष कॉलेज परिसर पूरी तरह रैगिंग मुक्त होंगे। राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पांडेय ने कहा कि यह सख्त कदम छात्रों के हित में है और इसमें सीनियर छात्र, जूनियर डॉक्टर्स व संस्थान प्रबंधन को सहयोग करना होगा।