
जबलपुर। यदि माता सीता भक्ति स्वरूप हैं तो शबरी भावना स्वरूप हैं। भावना से ही भक्ति की प्राप्ति की जा सकती है। चर्म के द्वारा मर्म को नहीं पाया जा सकता, इसीलिए भक्ति की प्राप्ति भी परमात्मा की कृपा से ही संभव है। यह उद्गार हनुमत जन्म सुफल करी माना प्रवचन माला के तृतीय दिवस पर युगतुलसी पंडित रामकिंकर जी महाराज के कृपापात्र शिष्य पंडित उमाशंकर शर्मा “व्यास” ने व्यक्त किए।
महेश भवन सभागार में श्रीरामचरितमानस परायण ज्ञान यज्ञ
महेश भवन सभागार, गोपालबाग, जबलपुर में रामायणम जबलपुर द्वारा आयोजित श्रीरामचरितमानस परायण ज्ञान यज्ञ में कथा का रसपान कराते हुए पंडित उमाशंकर शर्मा “व्यास” ने कहा कि रामजी ने माता सीता का पता शबरी से पूछा, क्योंकि भक्ति का मार्ग भावना ही बताती है।
भगवान वात्सल्य के भूखे हैं
महाराज श्री ने कहा कि भगवान केवल वात्सल्य के भूखे हैं और शबरी वात्सल्यमयी मूर्ति हैं। शबरी गुरुभक्त हैं और गुरु की कृपा से ही परमात्मा की प्राप्ति संभव होती है। शबरी का भाव था कि श्रीराम मेरी साधना से नहीं, बल्कि गुरुदेव की कृपा से ही मेरे गृह आए हैं।
रामकथा जीवन को सही दिशा देती है
पंडित उमाशंकर शर्मा “व्यास” ने कहा कि मनुष्य अपने दुख से अधिक दूसरों के सुख से दुखी होता है। यही प्रवृत्ति उसे पतन की ओर ले जाती है। रामकथा ऐसा माध्यम है, जो इस कुबुद्धि से बचाकर जीवन के लक्ष्य की ओर अग्रसर करती है।
श्रद्धा और विश्वास से ही भक्ति सार्थक
उन्होंने कहा कि रामकथा का श्रवण केवल शरीर से नहीं, बल्कि मन, बुद्धि और चित्त से करना चाहिए। श्रद्धा और विश्वास के बिना की गई भक्ति कभी सार्थक नहीं हो सकती।
श्रीराम सरकार का पूजन एवं मंच संचालन
इस अवसर पर श्रीराम सरकार का पूजन सर्वश्री श्रीमती रेखा कैलाश गुप्ता, अशोक मनोध्या, प्रकाश मालपाणी, प्रह्लाद अग्रवाल, गोपाल नीखरा, रुचिमोहन, संध्या दुबे, रेणु अग्रवाल, मेवालाल छिरोलया, पं. अखिलेश त्रिपाठी, कामता तिवारी, केदारनाथ अग्रवाल, कैलाश लहरिया, प्रकाश अग्रवाल एवं नीलू तिवारी ने किया।
कार्यक्रम का मंच संचालन आचार्य डॉ. हरिशंकर दुबे ने किया, जबकि स्वस्तिवाचन पंडित रोहित दुबे, पं. सौरभ दुबे, पं. महेंद्र पांडेय, पंडित प्यासी जी सहित अन्य विद्वानों द्वारा संपन्न कराया गया।