बिहार में अविश्‍वसनीय किन्‍तु सत्‍य: 20 साल बाद भी एंटीइन्‍कंबंसी नहीं, फिर एक बार एनडीए सरकार

राजीव उपाध्‍याय

बिहार में 20 साल तक नीतीश कुमार की सरकार रही लेकिन इसके बाद भी 2025 के विधानसभा चुनाव में सरकार के प्रति एंटीइन्‍कंबंसी नहीं बनी, यह मिसाल बिहार में नीतीश कुमार ने बनाई। नीतीश कुमार के नेतृत्‍व में बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बन रही है। बिहार के चुनाव में एक्‍स फैक्‍टर “एम” रहा “एम-वाय” नहीं।

बिहार में जिस तरह से एनडीए के पक्ष में वोटों की बरसात हुई है यह खुद बीजेपी और जदयू के नेताओं को भी उम्‍मीद नहीं थी। वे करीब 160 सीट के आसपास की उम्‍मीद कर रहे थे लेकिन मतदाता ने एनडीए के पक्ष में दो सैकड़ा से अधिक सीट डाल दीं। वहीं कांग्रेस दहाई के अंक तक भी नहीं पहुंच सकी। वहीं तेजस्‍वी यादव की राघौपुर से सीट फंसी रही लेकिन वे बाद में चुनाव जीत गए।

पीएम ने बधाई दी

पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि नीतीश और सहयोगियों को बधाई। बिहार में सुशासन और विकास की जीत हुई है। हमारे विजन को देखकर जनता ने वोट दिया।

एनडीए की सुनामी

शाम 5 बजे तक बिहार के चुनाव परिणाम में एनडीए के पक्ष में जो आंकड़े आए वह सुनामी की तरह हैं। एनडीए 204 सीट, महागठबंधन 33 सीट अन्‍य 06 सीट पर पहुंची।

एनडीए- बीजेपी 92, जेडीयू 84, एलजेपी 19, अन्‍य 9
महागठबंधन- आरजेडी 25, कांग्रेस 5, वीआइपी 0, अन्‍य 3 पर आगे हैं।

एनडीए के पक्ष में सुनामी का कारण

– बिहार चुनाव में एक्‍स फैक्‍टर “एम” यानि महिला रहा। कुल महिला वोटर्स का पुरुषों की तुलना में 8.8% अधिक मतदान किया। पुरुषों मतदाता की संख्‍या अधिक होने के बाद भी महिला मतदाताओं का मतदान का प्रतिशत अधिक रहा। जोकि एनडीए के पक्ष में हो सकता है।

– राजनीति में कमिटमेंट, निरंतरता या स्थिरता जरूरी है कांग्रेस में इसकी कमी रही। जनता की नीतीश कुमार के प्रति विश्‍वसनीयता बरकरार रही।

– जेडीयू ने महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपए डाले। इसका असर भी हुआ।

– कांग्रेस ने एसआइआर और वोटचोरी का निगेटिव कैंपेन चलाया जो सफल नहीं हुआ उन्‍होंने वोट चोरी का मुद्दा भूतकाल का उठाया, लेकिन भविष्‍य का विजन नहीं बिहार के लिए स्‍पष्‍ट नहीं किया।

– कांग्रेस ने वोट चोरी रैली की लेकिन इसके बाद वे लंबे समय के लिए फील्‍ड से गायब हो गए। तेजस्‍वी यादव ने बिहार में अकेले रैली निकाली। इसका जनता के सामने कांग्रेस के लिए अच्‍छा असर नहीं हुआ। बिहार चुनाव के दौरान राहुल गांधी काफी समय तक फील्‍ड से गायब रहे इस दौरान वे कोलंबिया चले गए फिर पचमढ़ी चले गए। जिसका असर चुनाव परिणाम में देखने मिला।

– तेजस्‍वी यादव खुद को सीएम फेस घोषित करते रहे लेकिन कांग्रेस ने काफी समय के बाद उनको सीएम फेस घोषित किया जिसमें खुद राहुल गांधी मौजूद नहीं रहे।

– जनसुराज का खाता नहीं खुला, इसके बाद भी खाता नहीं खुला। इसके पीछे कारण यह हो सकता है कि नई पार्टी होने के कारण लोगों ने विश्‍वास नहीं किया। फील्‍ड में प्रशांत किशोर ने बहुत मेहनत की लेकिन वह वोट में कन्‍वर्ट नहीं हो सकी।

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