
पटना। चुनाव आयोग के द्वारा 10 बजे तक घोषित चुनाव के रुझानों में एनडीए बढ़त बनाए हुए है। इससे अभी तक के रुझानों के अनुसार बिहार में एनडीए की सरकार बन सकती है। अभी तक 154 सीटों के रुझान सामने आए हैं। जिसमें जेडीयू 51, बीजेपी 48, हम 3, सीपीआइ-एमएल 2, एलजेपी-आर 13, आरजेडी 25, कांग्रेस 7,सीपीआइ एम 1 वीसीआइपी 1 टीपीएलएसपी 1, अन्य 1 पर आगे है।
चुनाव परिणाम का ट्रेंड यदि इसी तरह आगे रहता है तो बिहार में एनडीए की सरकार बन सकती है। जेडीयू रुझानों में आगे है जिससे नीतीश कुमार बिहार के सीएम बन सकते हैं। महागठबंधन में कांग्रेस केवल 7 सीटों पर आगे चल रही है वहीं आरजेडी 25 सीटों पर बढ़त बनाई हुई है। कांग्रेस ने 60 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन उस अनुपात के अनुसार उसके परिणाम अच्छे नहीं आ रहे हैं। इसका असर महागठबंधन पर हो सकता है। हालांकि अभी यह 10 बजे तक का रुझान है।
कांग्रेस रुझानों में पीछे: चुनाव लड़ने में एग्रेशन की कमी
महागठबंधन में कांग्रेस शुरुआती रुझानों में पीछे चल रही है। सुबह 9 बजे तक के चुनाव परिणामों में आरजेडी 70 सीटों पर आगे है, जबकि कांग्रेस केवल 12 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। यह अंतर साफ दर्शाता है कि चुनाव लड़ने की रणनीति और एग्रेशन में कांग्रेस कमजोर दिखाई दी।
यदि पीछे मुड़कर देखें तो महागठबंधन में जहां आरजेडी ने पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ा, वहीं कांग्रेस पूरे अभियान में उतनी सक्रिय नहीं दिखी। सीटों के बंटवारे में भी कांग्रेस को वे सीटें नहीं मिलीं, जिन्हें वह चाहती थी। इसके बजाय उसे अपेक्षाकृत कठिन सीटें मिलीं, जिन पर जीत की संभावना कम थी।
प्रचार अभियान की बात करें तो शुरुआत में राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ अभियान तेजस्वी यादव के साथ मिलकर जोर-शोर से शुरू किया था, लेकिन चुनाव घोषित होने के बाद वह जोश और दबाव बनाए नहीं रख पाए। इस बीच बिहार के स्थानीय मुद्दे प्रचार से गायब हो गए।
तेजस्वी यादव ने इसे समझते हुए बाद में खुद रैलियाँ निकालीं और बिहार के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, लेकिन इन रैलियों में कांग्रेस के बड़े नेता शामिल नहीं हुए। इससे महागठबंधन में असंतुलन और अधिक स्पष्ट हो गया।
इसके अलावा तेजस्वी यादव को महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने में कांग्रेस की देरी ने भी गठबंधन में समन्वय की कमी को उजागर किया। बिहार कांग्रेस के स्थानीय नेताओं, अध्यक्ष और पदाधिकारियों तथा आरजेडी नेताओं के बीच तालमेल कमजोर रहा। बिहार प्रभारी कृष्ण अल्लावरु को भी न तो आरजेडी और न ही स्थानीय कांग्रेस नेताओं का समर्थन मिला।
इन सभी कारणों का असर कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि यह शुरुआती रुझान हैं, आगे की मतगणना में कांग्रेस की स्थिति में सुधार भी संभव है।