जबलपुर का 1500 साल पुराना मां बूढ़ी खेरमाई मंदिर, मां धूमावती की उपासना की है विशेष परंपरा

जबलपुर। शहर के चार खंबा क्षेत्र में स्थित मां बूढ़ी खेरमाई मंदिर धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस मंदिर में मां धूमावती की उपासना की जाती है। स्थानीय मान्यता और प्रकाशित विवरणों के अनुसार, इस मंदिर की प्राचीनता करीब 1500 वर्ष मानी जाती है। यहां प्रतिदिन श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। मां धूमावती की जयंती के अवसर पर भी मंदिर में विधि-विधान से पूजन-अर्चन की तैयारियां की गई हैं।

नवरात्र में उमड़ते हैं श्रद्धालु

मां बूढ़ी खेरमाई मंदिर में शारदीय और वासंतिक नवरात्र के दौरान विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इन दिनों मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। भक्त मां के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

बाना चढ़ाने की है विशेष परंपरा

मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में बाना चढ़ाने का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर मां को बाना अर्पित करते हैं। यह परंपरा मंदिर की विशिष्ट धार्मिक पहचान का हिस्सा मानी जाती है। मां धूमावती के दर्शन और पूजा के लिए शहर के विभिन्न क्षेत्रों के साथ आसपास के इलाकों से भी भक्त यहां पहुंचते हैं।

आस्था और साधना का प्रमुख केंद्र

चार खंबा क्षेत्र स्थित मां बूढ़ी खेरमाई मंदिर जबलपुर की पुरानी देवी-उपासना परंपरा से जुड़ा हुआ है। यहां मां धूमावती की आराधना का विशेष धार्मिक महत्व है। मंदिर में नियमित पूजन-अर्चन के साथ पर्व और विशेष तिथियों पर भी श्रद्धालु पहुंचकर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।