
नई दिल्ली । चुनाव आयोग ने रविवार को पत्रकारवार्ता में एसआइआर से लेकर चुनाव संबंधी हर सवाल का जवाब दिया। राहुल गांधी का नाम लिए बिना मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि संगीन आरोपों के लिए हलफनामा देना होगा। एक सप्ताह के अंदर सबूत दें या देश से माफी मांगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव की हर प्रक्रिया पत्रकारों को बताई।
15 दिन बाकी, भेजें आपत्ति
सीईसी ने कहा कि अभी 15 दिन बाकी हैं। एक सितम्बर तक कोई भी आपत्ति दर्ज करा सकता है। सभी राजनैतिक दल गल्तियां बताएं जिसका निराकरण चुनाव आयोग कर देगा। लेकिन 1 सितम्बर के बाद नहीं।
मतदाता के साथ चुनाव आयोग खड़ा
सीईसी ने कहा कि हर मतदाता के साथ चुनाव आयोग चट्टान के साथ खड़ा है। चुनाव आयोग निडरता के साथ गरीब, अमीर, सहित सभी वर्गों के मतदाता के साथ बिना भेदभाव के चट्टान के साथ खड़ा है और खड़ा रहेगा।
ये हैं मुख्य बातें
– 20 साल में हर साल रिविजन होता है। भारत में अब तक 10 से अधिक इंटेंसिव रिविजन हो चुके हैं। सूची नए सिरे से बनाई जाती है।
– लोक प्रतिनिधित्व कानून सबके लिए बराबर है। यदि व्यक्ति उस निर्वाचन क्षेत्र में नहीं रहता है जहां की शिकायत करता है तो उसे शपथ पत्र देना होगा।
– सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हर जिले की मतदाता सूची वेबसाइट पर डाल दी गई है।
– बिहार में तीन लाख लोगों के पास एक ही एपिक नंबर था।
– मशीन रीडेबल लिस्ट नहीं दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है।
– वोट एक मतदाता एक ही बार डाल सकता है। बाकी भ्रम फैलाया जा रहा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधान सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। यदि कोई व्यक्ति उस विधानसभा क्षेत्र का निर्वाचक है तो वह समय पर फॉर्म 6, 7 या 8 भरकर शिकायत कर सकता है। वहीं, अगर शिकायतकर्ता उस क्षेत्र का मतदाता नहीं है तो नियम 20(3)(बी) के तहत गवाह के रूप में शपथ पत्र देना अनिवार्य है।
विदेशी नागरिकों को मतदान का अधिकार नहीं
सीईसी ने दो टूक कहा कि भारत के संविधान के मुताबिक केवल भारतीय नागरिक ही विधायक या सांसद का चुनाव कर सकते हैं। किसी अन्य देश के नागरिकों को यह अधिकार नहीं है। यदि ऐसे लोगों ने पंजीकरण कराया है तो उसकी जांच विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत की जाएगी।
सूची पारदर्शी तरीके से साझा
ज्ञानेश कुमार ने बताया कि एसडीएम द्वारा प्रकाशित मसौदा सूची और अंतिम सूची राजनीतिक दलों के साथ साझा की जाती है। यह चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध होती है। प्रत्येक उम्मीदवार को पोलिंग एजेंट नियुक्त करने और उसी सूची तक पहुंचने का अधिकार होता है।
45 दिन में हाईकोर्ट जाने का प्रावधान
सीईसी ने कहा कि परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी उम्मीदवार या दल को 45 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका दाखिल करने का प्रावधान है। यदि इस अवधि में आपत्ति दर्ज नहीं होती और बाद में “वोट चोरी” जैसे आरोप लगाए जाते हैं तो यह जनता को गुमराह करने का प्रयास है।
मतदाताओं की गोपनीयता पर सवाल
उन्होंने चिंता जताई कि हाल में कुछ मतदाताओं की तस्वीरें और निजी वीडियो बिना अनुमति के सार्वजनिक किए गए। उन्होंने कहा कि किसी भी मतदाता की गोपनीयता का उल्लंघन अस्वीकार्य है। मतदाता सूची में दर्ज नाम ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं।
राजनीतिक दलों पर भी उठाए सवाल
सीईसी ने कहा कि कई बार राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्षों द्वारा सत्यापित दस्तावेज और रिपोर्ट उनके शीर्ष नेताओं तक नहीं पहुंचते, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने सभी हितधारकों से सहयोग की अपील की और कहा कि बिहार के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को सफल बनाने के लिए सभी दल प्रतिबद्ध हैं।
भेदभाव नहीं करता चुनाव आयोग
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग के लिए सभी राजनीतिक दल समान हैं। आयोग का गठन ही इसलिए हुआ है कि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे। पिछले दो दशकों से सभी दल मतदाता सूची में सुधार की मांग करते रहे हैं और इसी दिशा में बिहार से विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू किया गया है।