
दीपावली का महापर्व सामान्यतः पांच दिनों तक मनाया जाता है, लेकिन इस वर्ष यह पर्व छह दिनों तक चलने वाला है। 18 अक्टूबर को धनतेरस से दीप पर्व की शुरुआत होकर 23 अक्टूबर को भाई दूज के दिन इसका समापन होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस दिन सूर्यास्त के बाद एक घड़ी अधिक तक अमावस्या तिथि रहे, उसी दिन दीपावली मनाना सर्वोत्तम माना जाता है।
अमावस्या की रात्रि में होता है देवी लक्ष्मी का आगमन
धार्मिक परंपरा के अनुसार कार्तिक अमावस्या की रात्रि को माता लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं। इसी कारण दीपावली का पर्व अमावस्या की रात में मनाया जाता है। इस अवसर पर भक्तजन दीप जलाकर माता लक्ष्मी का स्वागत करते हैं और अपने घरों में समृद्धि की कामना करते हैं।
ज्योतिषाचार्य ने बताया प्रदोष काल में पूजन का महत्व
ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे ने धर्मसिन्धु ग्रंथ के आधार पर बताया कि यदि अमावस्या प्रदोष व्यापिनी हो तो उसी दिन महालक्ष्मी पूजन, संध्या दीपदान और महाकाली पूजन करना चाहिए तथा अगले दिन अभ्यंग स्नान किया जाता है। यदि अमावस्या तिथि प्रदोष व्यापिनी के साथ साढ़े तीन प्रहर से अधिक प्राप्त होती है तो दीपावली का पूजन उसी दिन चतुर्दशी युक्त में किया जाता है।
शास्त्रों में उल्लिखित विधि
श्री व्रतराज ग्रंथ में लिखा है –
“ततः प्रदोषसमये पूजये दिन्दिराम शुभाम।”
अर्थात कार्तिक कृष्ण अमावस्या को प्रदोषकाल में लक्ष्मी पूजन करना चाहिए। इसी प्रदोषकाल में दीपदान और महालक्ष्मी की आराधना करने का विधान है। धर्मसिन्धु ग्रंथ के अनुसार, यदि पर्व के तिथि को लेकर कोई संशय हो तो निर्णय के लिए धर्मसिन्धु को ही प्रधानता दी जाती है। इसी आधार पर इस वर्ष सोमवार, 20 अक्टूबर 2025 को दीपावली मनाई जाएगी।
अमावस्या तिथि का समय
इस बार अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 2:36 बजे से आरंभ होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 4:04 बजे तक रहेगी। यही कारण है कि लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त सोमवार, 20 अक्टूबर को ही रहेगा। इसी दिन प्रदोषकाल में दीपावली के पारंपरिक पूजन एवं दीपदान का आयोजन किया जाएगा।
छह दिनों तक चलने वाले दीप पर्व की तिथियां
- 18 अक्टूबर: धनतेरस
- 19 अक्टूबर: नरक चौदस
- 20 अक्टूबर: दीपावली पर्व एवं लक्ष्मी पूजन
- 21 अक्टूबर: श्राद्ध अमावस्या
- 22 अक्टूबर: गोवर्धन पूजन एवं अन्नकूट महोत्सव
- 23 अक्टूबर: भाई दूज
आस्था और परंपरा का पर्व
दीपावली न केवल प्रकाश और उल्लास का पर्व है, बल्कि धार्मिक आस्था, समृद्धि और पारिवारिक एकता का प्रतीक भी है। इस अवसर पर लोग अपने घरों की सजावट करते हैं, दीप जलाते हैं और लक्ष्मी-गणेश की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।