गणपति बप्पा मोरिया, अगले बरस तू जल्दी आ…

भक्ति भाव के साथ किया गया प्रतिमाओं का विसर्जन

जबलपुर। दस दिनों तक पूरे उत्साह और श्रद्धा से मनाया गया गणेश उत्सव शनिवार को अनंत चतुर्दशी के साथ संपन्न हो गया। इस दौरान पूरे शहर में “गणपति बप्पा मोरिया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारों की गूंज सुनाई दी। भक्तगण गणेश प्रतिमाओं को श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ विसर्जन के लिए लेकर घाटों और तालाबों की ओर बढ़े।

नर्मदा घाटों पर उमड़ा जनसैलाब

गौरीघाट, तिलवाराघाट, भेड़ाघाट सहित नर्मदा के प्रमुख घाटों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन हेतु पहुंचे। सुबह से ही घाटों पर भीड़ उमड़ पड़ी। ढोल-नगाड़ों की थाप, भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चारण के बीच प्रतिमाओं को विसर्जन स्थल तक लाया गया। महिलाएं मंगल गीत गा रही थीं, जबकि युवा और बच्चे बप्पा के जयकारे लगाते हुए नाच-गाते आगे बढ़े।

बड़ी प्रतिमाओं के लिए विशेष कुंड

नर्मदा नदी के जल को प्रदूषण से बचाने के लिए इस वर्ष भी प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की थी। बड़ी प्रतिमाओं का विसर्जन नदी के किनारे बनाए गए कृत्रिम कुंडों में किया गया। यहां मशीनों और क्रेनों की मदद से प्रतिमाओं को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से जल में विसर्जित किया गया। इस व्यवस्था से नदी का जल स्वच्छ बनाए रखने और पर्यावरण की रक्षा करने का प्रयास किया गया।

शहर के तालाबों में भी हुआ विसर्जन

नर्मदा घाटों के अलावा शहर के प्रमुख तालाबों जैसे रानीताल, हनुमानताल, चेरीताल और गोकलपुर तालाब पर भी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ। सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालु यहां आते रहे। नगर निगम और प्रशासन ने तालाबों पर पर्याप्त सुरक्षा और साफ-सफाई की व्यवस्था की थी। गोताखोरों और बचाव दल की मौजूदगी ने श्रद्धालुओं को सुरक्षा का भरोसा दिया।

भक्तों की आंखों में भावनाएं

प्रतिमाओं के विसर्जन के समय भक्तों की आंखें नम हो गईं। महिलाएं प्रतिमाओं की आरती उतारकर अगले वर्ष पुनः आगमन की प्रार्थना कर रही थीं। बच्चों के चेहरों पर भी भावुकता झलक रही थी। श्रद्धालुओं ने कहा कि दस दिनों तक बप्पा हमारे बीच रहे, भक्ति और आनंद का वातावरण बना। अब अगले वर्ष के इंतजार के साथ विदाई दी जा रही है।

व्यवस्था में प्रशासन की भूमिका

नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने इस अवसर पर व्यापक प्रबंध किए थे। घाटों और तालाबों पर बैरिकेडिंग की गई, पुलिस बल की तैनाती रही और यातायात को भी नियंत्रित किया गया। सफाई व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया। गोताखोर और एनडीआरएफ की टीम मौके पर मौजूद रही ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटा जा सके।

भक्ति और संस्कृति का संगम

गणेश विसर्जन केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्सव भी रहा। जगह-जगह भजन मंडलियों ने भक्ति गीत प्रस्तुत किए। कई स्थानों पर झांकियां और शोभायात्राएं भी निकाली गईं। युवाओं ने ढोल-झांझ की थाप पर नृत्य किया तो बुजुर्ग शांत भाव से प्रार्थना और मंत्रोच्चारण करते रहे।

गणेश उत्सव की विरासत

अनंत चतुर्दशी पर गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन भले ही हो गया हो, लेकिन भक्तों के मन में बप्पा की छवि और भक्ति का उत्साह हमेशा जीवित रहेगा। गणेश उत्सव केवल पूजा और विसर्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में एकता, सामूहिकता और भक्ति का संदेश भी देता है। भक्त अब अगले वर्ष गणेश चतुर्थी पर पुनः बप्पा के स्वागत के लिए प्रतीक्षा करने लगे हैं।

महाराष्ट्र समाज जबलपुर के गणपति बप्पा विसर्जित

श्री गणेशोत्सव की स्थापना के 127 वे वर्ष का विसर्जन सोलहा महाराष्ट्र स्कूल में विधि विधान से महाराष्ट्र ब्रम्ह वृंद समाज के वैदिक गुरु जी नीलेश दाभोलकर स्वप्निल गरे, जयेश टकलकर मार्गदर्शन में संपन्न हुई। हनुमानताल विसर्जन पूजन अर्चन डा रवि फडनवीस,राजेन्द्र बर्वे, चिन्मय जोशी, हर्षल पुणतांबेकर , पलक चारवेकर, सहित महाराष्ट्र समाज गणेशोत्सव समिति के सभी भक्त उपस्थित रहे।

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