
जबलपुर। मदन महल आमनपुर स्थित कालीमठ दरबार में अगहन अमावस्या के पावन अवसर पर मां निरंकार काली के प्राकट्य उत्सव को विशेष रूप से मनाया जा रहा है। मान्यता है कि 02 दिसंबर 1975 (अगहन अमावस्या) को सद्गुरु द्वादश पीठाधीश्वर परम पूज्य दंडी स्वामी कालिका नंद सरस्वती जी (श्री प्यारे नंद जी महाराज) की कठोर साधना और भक्ति से प्रसन्न होकर मां निरंकार काली ने साक्षात दर्शन दिए थे। यही दिव्य स्थल आज भी भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है, जहां श्रद्धापूर्वक उपासना-पूजन करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने का विश्वास किया जाता है।
20 नवंबर 2025 को मनाया जाएगा प्राकट्य उत्सव
इस वर्ष अगहन अमावस्या 20 नवंबर 2025 को पड़ रही है, जो मां निरंकार काली के दिव्य प्राकट्य दिवस की स्वर्णिम वर्षगांठ भी है। इस अवसर पर कालीमठ दरबार में ब्रह्म मुहूर्त से देर रात तक विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। वैदिक ऋचाओं और आचार्य गणों के निर्देशन में पूजन, हवन और अभिषेक की व्यवस्था की गई है। दिनभर भक्तों के लिए भंडारा एवं प्रसाद वितरण भी होगा।

सायंकाल भव्य श्रृंगार दर्शन और मध्यरात्रि आकाशीय महाआरती
आयोजकों के अनुसार 20 नवंबर को सायं 5 बजे से मां निरंकार काली का भव्य श्रृंगार दर्शन कराया जाएगा। इसके बाद रात्रि 12 बजे से विशेष “आकाशीय महाआरती” संपन्न होगी, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होंगे। कालीमठ परिसर को रोशनी और पुष्प सज्जा से सुसज्जित किया जा रहा है।
काली धाम भटौली में भी धार्मिक कार्यक्रम
उसी दिवस 20-11-2025 को काली धाम भटौली में मां विराट काली के 33वें स्थापना दिवस का उत्सव भी मनाया जाएगा। यहां दोपहर 12 बजे से महाआरती, भंडारा और प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई है। भक्त इन दोनों ही प्रमुख स्थलों पर जाकर पूजन-अर्चन कर सकेंगे।
12 नवंबर से चल रहे विविध धार्मिक अनुष्ठान
मां निरंकार काली के प्राकट्य उत्सव के उपलक्ष्य में 12 नवंबर से कालीमठ दरबार में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम जारी हैं। प्रतिदिन विशेष पूजा, पाठ, अनुष्ठान और भजन-संध्या का आयोजन हो रहा है। स्थानीय भक्तों के साथ-साथ बाहरी जिलों से भी श्रद्धालुओं का आगमन निरंतर बढ़ रहा है।
कालीमठ और काली धाम में होने वाले इस महोत्सव को लेकर भक्तों में उत्साह का विशेष माहौल है। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से पावन उत्सव में सम्मिलित होकर मां काली के आशीर्वाद का लाभ लेने का आग्रह किया है।