भगवान की पहचान के लिए जीवन में होती है गुरु की जरूरत: स्वामी भगवतानंद गिरी महाराज

जबलपुर। श्री राम जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में जबलपुर के मदन महल स्थित श्री राम मंदिर में आयोजित श्री राम कथा के दौरान कथा वाचक स्वामी भगवतानंद गिरी महाराज ने शिव विवाह प्रसंग के साथ जीवन से जुड़े गूढ़ आध्यात्मिक संदेश दिए।

शिव बारात और अनोखी परंपरा का वर्णन

कथा में बताया गया कि शिव बारात में भूत-प्रेत भी शामिल होते हैं, जो भगवान शिव की अनोखी और व्यापक स्वरूप को दर्शाता है। इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया।

शिव आराधना और दृष्टिकोण का महत्व

स्वामी जी ने कहा कि शिव बारात में जो भी शामिल था उसका अपना महत्‍व है। जो भूत बिना मुख के हैं उससे आशय है कि शांत रहकर शिव आराधना करना ही सच्ची भक्ति है। जो बिपुल मुख वह है जो हर ओर भगवान शंकर को देखता है।

अपमान में भी सम्मान देखने का संदेश

कथा के दौरान यह भी बताया गया कि अपमान में भी जो सम्मान देख ले, वही महादेव का स्वरूप है। एक प्रसंग में थाली और दीपक गिरने को ब्रह्मा जी ने अपमान बताया, लेकिन महादेव ने इसे अपमान नहीं माना।

पूर्व जन्म कथा और नारद जी का प्रसंग

पूर्व जन्म की कथा नारद जी द्वारा महारानी मैना को सुनाई गई, जिसमें जीवन के रहस्यों को समझाया गया।

जीवन में गुरु और सत्संग का महत्व

कथा में बताया गया कि जीवन में भगवान की पहचान सद्गुरु ही कराते हैं। भगवान के साथ सत्संग भी जरूरी है और जीवन में सत्संग का विशेष महत्व होता है। गुरु ही जीवन में आने वाली कठिनाइयों से बचाते हैं और सही मार्ग दिखाते हैं।

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