Makar Sankranti 2026: वाराह पर आ रही मकर संक्रांति, 15 जनवरी को स्नान दान का विशेष योग

जबलपुर। वाराह पर सवार होकर मकर संक्रांति का पावन पर्व आ रहा है। इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी, जिसका प्रभाव विशेष रूप से सकारात्मक रहेगा और व्यापारी वर्ग को लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस अवसर पर पवित्र नदी में स्नान और उसके पश्चात दान करने की परंपरा है, जिसे अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

14 जनवरी की रात्रि को लगेगी मकर संक्रांति

ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति बुधवार 14 जनवरी को माघ कृष्ण एकादशी तिथि में अनुराधा एवं ज्येष्ठा नक्षत्र के संयोग में मनाई जाएगी। मकर संक्रांति की अर्की 14 जनवरी की रात्रि 9 बजकर 29 मिनट पर होगी। वहीं इसका पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहेगा।

पुण्यकाल में दान का विशेष महत्व

मकर संक्रांति के पुण्यकाल में तिल, वस्त्र, मच्छरदानी, कंबल, गौदान, स्वर्णदान आदि का यथाशक्ति दान करना चाहिए। संक्रांति पर दान, स्नान और जप का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। 15 जनवरी को स्नान-दान, जप, तुलादान, गौदान, स्वर्णदान एवं वृक्षारोपण करना विशेष शुभ माना गया है।

इस वर्ष मकर संक्रांति का वाहन और स्वरूप

इस वर्ष मकर संक्रांति का वाहन वराह है, जबकि उपवाहन वृषभ रहेगा। वस्त्र का रंग हरा बताया गया है। छह वर्ष बाद यह संक्रांति विशेष रूप से हरे वस्त्र धारण किए, हाथ में खड्ग लिए, ताम्र पात्र लेकर भिक्षा का भक्षण करती हुई कुमारी अवस्था में प्रवेश कर रही है। वराह वाहन साहस, शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, जबकि वृष उपवाहन धर्म और ऊर्जा का संकेत देता है।

अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव

इस वर्ष मकर संक्रांति अनुराधा नक्षत्र में होने से विशेष शुभ फल प्राप्त होंगे। अनुराधा नक्षत्र के प्रभाव से राजाओं में सुख-शांति रहती है, रस पदार्थों विशेषकर दूध की उपलब्धता बढ़ती है तथा खेती की उपज अधिक होती है। गेहूं, चना जैसे अनाजों का उत्पादन शुभ और प्रचुर रहता है। मांगलिक कार्यों में वृद्धि होती है, रोगों का नाश होता है और जनता निर्भय रहती है। क्षत्रिय एवं व्यापारी वर्ग के लिए यह समय सुखद एवं लाभकारी रहेगा।

अनाज और राजनीति पर पड़ेगा असर

नक्षत्र संकेत दे रहे हैं कि अनाज के मूल्यों में अधिक उतार-चढ़ाव नहीं रहेगा, हालांकि राजनीतिक हलचल में वृद्धि देखने को मिल सकती है। बुधवार को मकर संक्रांति पड़ने से अनाजों के भाव में तेजी आती है, छल-कपट की वृद्धि होती है, शीतलहर का प्रकोप बढ़ता है, जिससे जन-धन की हानि की संभावना रहती है। वहीं खंड वृष्टि की स्थिति भी बन सकती है, लेकिन इसके साथ ही अन्न उत्पादन अधिक होता है और जनता सुखी रहती है।

राशियों पर मकर संक्रांति का प्रभाव

मकर संक्रांति का राशियों पर प्रभाव इस प्रकार रहेगा — मेष: कष्ट, वृष: सम्मान, मिथुन: संकट, कर्क: यश, सिंह: विवाद, कन्या: लाभ, तुला: पदोन्नति, वृश्चिक: धन लाभ, धनु: हानि, मकर: लाभ, कुंभ: सिद्धि, मीन: स्थानांतरण।

काले तिल का दान विशेष फलदायी

मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदी में स्नान के बाद गरीब और जरूरतमंद को काले तिल का दान करने से शनि दोष दूर होता है। इस दिन तिल का सेवन और तिल से बने पदार्थों का दान विशेष पुण्यकारी माना गया है।

उत्तरायण का धार्मिक महत्व

सूर्य भगवान छह महीने उत्तरायण और छह महीने दक्षिणायण रहते हैं। उत्तरायण को देवताओं का दिन और राक्षसों की रात माना गया है, जबकि दक्षिणायण देवताओं की रात्रि और राक्षसों का दिन होता है। दक्षिणायण काल में शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। सूर्य जब उत्तरायण में अर्थात मकर राशि में प्रवेश करता है, तभी से शुभ कार्यों की शुरुआत की जाती है।

स्नान-दान से मिलेगा पुण्य फल

संक्रांति के पुण्यकाल में पवित्र नदियों में डुबकी लगाने की मान्यता है। इससे पुण्य फल की प्राप्ति होती है। 15 जनवरी को स्नान-दान, जप और दान करने से विशेष शुभ फल प्राप्त होंगे।

Back to top button