मकर संक्रांति की अर्धरात्रि में जलखण्डेश्वर नाथ की पावन डुबकी, हजारों श्रद्धालु बने साक्षी

दमोह/हटा। दमोह–पन्ना जिले की सीमा पर गैसाबाद क्षेत्र में व्याराम नदी के मध्य स्थित प्रसिद्ध जलखण्डेश्वर धाम मकर संक्रांति के पावन पर्व पर आस्था, भक्ति और अलौकिक महासंयोग का साक्षी बना। क्षेत्रवासियों की गहरी आस्था का यह केंद्र इस वर्ष विशेष धार्मिक महत्व के कारण चर्चा में रहा।

अर्धरात्रि में हुआ ऐतिहासिक महासंयोग

इस वर्ष मकर संक्रांति की अर्धरात्रि को एक ऐतिहासिक महासंयोग के अंतर्गत श्री जलखण्डेश्वर नाथ ने पहली बार पावन डुबकी लगाई। इस दुर्लभ एवं अलौकिक क्षण के साक्षी हजारों श्रद्धालु बने। जैसे ही यह पावन क्षण आया, संपूर्ण धाम हर-हर महादेव और सीताराम के जयघोष से गूंज उठा, जिससे क्षेत्र का वातावरण अत्यंत भक्तिमय हो गया।

हजारों श्रद्धालु बने साक्षी

अर्धरात्रि में हुई इस पावन डुबकी को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलखण्डेश्वर धाम में एकत्रित हुए। श्रद्धालुओं में इस अद्भुत घटना को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। श्रद्धा, आस्था और भक्ति का ऐसा संगम लंबे समय तक लोगों की स्मृति में रहेगा।

महाप्रसाद वितरण की परंपरा

मेले के दौरान प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी जलखण्डेश्वर शिवभक्तों द्वारा महाप्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। शिवभक्त रजनीश तिवारी ने बताया कि यहां पिछले लगभग सात वर्षों से निरंतर महाप्रसाद का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें हर वर्ष हजारों श्रद्धालु सहभागिता कर प्रसाद ग्रहण करते हैं।

अखंड सीताराम धुन संकीर्तन

धाम परिसर में अखंड श्री सीताराम धुन संकीर्तन सहित विविध धार्मिक आयोजन निरंतर जारी हैं। पंडित श्याम सुंदर रावत ने बताया कि यह आयोजन हरि इच्छा तक अनिश्चित काल तक चलता रहेगा। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलमग्न धाम पहुंचकर संकीर्तन में सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।

भक्तिमय वातावरण से सराबोर धाम

पूरे जलखण्डेश्वर धाम क्षेत्र में शिव भक्ति और राम नाम की गूंज के साथ अत्यंत भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त है। मकर संक्रांति के इस पावन अवसर पर जलखण्डेश्वर धाम श्रद्धा और आस्था का जीवंत केंद्र बनकर उभरा।

रिपोर्ट: जिमी नगरिया 

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