अजब है व्यवस्था, मध्‍यप्रदेश के आयुर्वेद कॉलेजों में जरूरी पद ही सृजित नहीं

भोपाल। राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के सातों शासकीय आयुर्वेद कॉलेजों में कौमारभृत्य विभाग तथा 06 शासकीय कॉलेजों में अगदतंत्र में प्रोफेसर का पद ही सृजित नहीं है। बहुत बड़ी विडंबना है कि राजधानी भोपाल, जबलपुर, रीवा, उज्जैन, ग्वालियर , इंदौर, बुरहानपुर के शासकीय आयुर्वेद कॉलेजों में कौमारभृत्य ( बालरोग – पीडिया) विभाग में प्रोफेसर का पद ही सृजित नहीं है। अजब बात यह कि एक दूसरे विषय विभाग अगदतंत्र ( टॉक्सीकोलॉजी) में भी भोपाल के पं खुशीलाल शासकीय आयुर्वेद कॉलेज को छोड़कर अन्य समस्त 06 कॉलेजों में प्रोफेसर का पद सृजित नहीं है।

यह असर हो रहा है

इन दोनों विभागों में प्रोफेसर का पद नहीं होने से किसी भी शासकीय कॉलेज में बीएएमएस की 100 सीटें नहीं हैं। जब पद ही सृजित नहीं हैं तो प्रोफेसर्स कहां से होंगे। इसीलिये केवल 75 यूजी सीटों तक ही सीमित हैं, शासकीय आयुर्वेद कॉलेज। जबकि देशभर के आयुर्वेद कॉलेज 200 यूजी सीटों तक के स्थापन में प्रयासरत हैं।

आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता व निजी आयुर्वेद महाविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ राकेश पाण्डेय ने चर्चा में बताया कि भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग ( नेशनल कमीशन फॉर इण्डियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन) नईदिल्ली के मापदणडानुसार आयुर्वेद कॉलेजों के 14 विभाग क्रमश: संहिता सिद्धांत, रचना शारीर, क्रिया शारीर, द्रव्यगुण, रस शास्त्र एवं भैषज्य कल्पना, रोगनिदान, अंगद तंत्र, स्वस्थवृत्त, कायचिकित्सा, पंचकर्म, शल्यतंत्र, शालाक्यतंत्र, प्रसूति स्त्रीरोग, कौमारभृत्य आदि 14 विभागों में लेक्चरर, रीडर व प्रोफेसर होना आवश्यक है।

केवल 60 यूजी सीटों हेतु रीडर या प्रोफेसर की बाध्यता है परंतु अगर 100 सीटें, 150 सीटें, या 200 सीटें बढ़ाना हो तो प्रोफेसर समेत क्रमश: 60 सीटों के लिये 36, 100 सीटों के लिये 51, 150 सीटों के लिये 70 तथा 200 सीटों के लिये 90 टीचिंग स्टॉफ अनिवार्य है। अभी भी प्रदेश के शासकीय आयुर्वेद कॉलेजों में टीचिंग स्टॉफ, चिकित्सक स्टॉफ व पैरामेडिकल स्टॉफ के कुल मिलाकर 100 से ज्यादा पदों की कमी है। अब जबकि आने वाले वर्षों में प्रदेश में 11 से ज्यादा नवीन शासकीय आयुर्वेद कॉलेज खुलना है तो कैसे खुल सकेंगे।

हलॉकि आयुर्वेद शिक्षक एसोसिएशन प्रयासरत है परंतु शासकीय स्तर पर बीते 25 से भी ज्यादा वर्षों में भी बहुत ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिला है।

मान्यता पर प्रभाव

एनसीआईएसएम, आयुष मंत्रालय नई दिल्ली, प्रदेश वा देशभर के आयुर्वेद कॉलेजों का निरक्षण करेगा। यदि कमियां बनी रहीं तो मान्यता प्रभावित हो सकती है।

हस्तक्षेप की मांग

मुख्यमंत्री, आयुष मंत्री, संचालक आयुक्त आयुष विभाग मध्यप्रदेश शासन से हस्तक्षेप की मांग करते हैं कि शीघ्र ही समस्त शासकीय आयुर्वेद कॉलेजों में कौमारभृत्य व अगदतंत्र विभागों में प्रोफेसर पद का सृजन कर नियुक्ति या पदोन्नति की जावे ताकि मान्यता भी बची रहे और 100 से 200 यूजी सीटें भी बढ़ सकें।

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