मप्र में निजी अस्‍पतालों में एनएबीएच की फुल संबद्धता अनिवार्य, वरना आयुष्‍मान योजना से होंगे बाहर

राजीव उपाध्‍याय

जबलपुर। मप्र के 4 महानगरों के प्राइवेट अस्‍पतालों के लिए एक आदेश ने हड़कंप की स्थिति बना दी है। यह आदेश यदि लागू हो गया तो मप्र के अधिकतर प्राइवेट अस्‍पताल आयुष्‍मान भारत योजना से बाहर हो जाएंगे। इस आदेश में साफ कहा गया है कि आयुष्‍मान भारत योजना में केवल उन्‍हीं अस्‍पतालों को मान्‍यता मिलेगी जो एनएबीएच से फुल संबद्धता लिए हुए हैं।

एंट्री लेवल की संबद्धता लिए अस्‍पतालों को छह माह का समय दिया गया है कि वे फुल संबद्धता के लिए आवेदन करके जांच कराएं और एनएबीएच फाइनल लेवल क्‍वालिटी सर्टिफिकेट लें। नर्सिंग होम एसोसिएशन के साथ ही आइएमए व अन्‍य संस्‍थान भी इस आदेश का विरोध कर रहे हैं। नर्सिंग होम एसोसिएशन इस आदेश को गरीब मरीज के लिए अहितकर मान रहा है क्‍योंकि इससे उनका इलाज प्रभावित होगा।

ये है आदेश

आयुष्‍मान भारत योजना मप्र के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी के अनुसार भोपाल, इंदौर, जबलपुर एवं ग्‍वालियर के वे अस्‍पताल जिनके पास एनएबीएच एंट्री लेवल है उनको आगामी छह माह (31 मार्च 2026) तक एनएबीएच फाइनल लेवल क्‍वालिटी सर्टिफिकेट प्राप्‍त करना अनिवार्य होगा। यदि इस अवधि तक प्रमाण पत्र नहीं लिया तो उनकी संबद्धता समाप्‍त हो जाएगी। 1 अप्रैल 2026 तक केवल वही अस्‍पताल आयुष्‍मान योजना से संबद्ध होंगे जिनके पास एनएबीएच फाइनल लेवल क्‍वालिटी सर्टिफिकेट होगा।

जबलपुर की स्थिति

जबलपुर में 43 अस्‍पताल आयुष्‍मान भारत योजना से संबद्ध हैं। इनमें 10 सरकारी अस्‍पताल हैं। 33 प्राइवेट अस्‍पताल आयुष्‍मान योजना से संबद्ध हैं। इनमें 7 प्राइवेट अस्‍पताल एनएबीएच से फुल संबद्ध हैं। इनके पास एनएबीएच फाइनल लेवल क्‍वालिटी सर्टिफिकेट है। 6 प्राइवेट अस्‍पतालों के पास एंट्री लेवल एनएबीएच सर्टिफिकेट है। शेष प्राइवेट अस्‍पतालों के पास एनएबीएच नहीं है लेकिन वे पहले से संबद्ध हैं। इन सभी को अब फाइनल लेवल क्‍वालिटी सर्टिफिकेट लेना होगा।

क्‍या है एनएबीएच

एनएबीएच (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्‍स एंड हेल्‍थकेयर प्रोवाइडर्स) अस्‍पतालों में बेहतर हेल्‍थ की देखभाल की गुणवक्‍ता और मरीजों की सुरक्षा से संबंधित मानक तय करता है और उसे अस्‍पतालों में लागू करता है। इससे अस्‍पतालों को संबद्ध करने के लिए एनएबीएच की टीम अस्‍पतालों का निरीक्षण करती है और देखती है कि पैरामीटर के अनुसार अस्‍पताल हैं कि नहीं। इससे स्‍वास्‍थ्‍य सेवा में सुधार होता है। यह दो लेवल पर दी जाती है पहला एंट्री लेवल इसके बाद फाइनल लेवल सर्टिफिकेट दिया जाता है।

अधिकांश अस्‍पतालों में एंट्री लेवल सर्टिफिकेट

जबलपुर सहित इंदौर, भोपाल, ग्‍वालियर के अधिकांश निजी अस्‍पतालों में एनएबीएच एंट्री लेवल की मान्‍यता है। फाइनल सर्टिफिकेट प्राप्‍त करने के लिए फीस जमा करके कुछ और निर्धारित मापदंड पूरे करके निरीक्षण करवाना होता है उसके बाद ही एनएबीएच फाइनल सर्टिफिकेट मिलता है।

क्‍यों हो रहा विरोध

मप्र नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्‍यक्ष अमरेंद्र पांडे का कहना है कि यह मरीजों के अधिकार का हनन है। इससे योजना की भावना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यह भेदभावपूर्ण निर्णय है, केवल चार महानगरों में ही इसे क्‍यों लागू किया जा रहा है। एनएबीएच एक निजी संस्‍था है। यह किसी सरकारी प्राधिकरण के अधीन नहीं है। अस्‍पतालों को अनिवार्य रूप से इसके अधीन करना गलत है। इसके अलावा आइएमए, नियोइथिकल प्रोफेशनल्‍स एसोसिएशन ने भी इस आदेश का विरोध किया है। संगठनों ने सरकार से इस आदेश को वापस लेने की मांग की है। संगठन ने प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्री, स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री को पत्र भेजा है।

आदेश आया है, प्रक्रिया पूरी करनी होगी

आयुष्‍मान भारत योजना मप्र से आदेश आया है। इसके अनुसार अस्‍पताल जिनके पास एनएबीएच एंट्री लेवल है उनको आगामी छह माह तक एनएबीएच फाइनल लेवल क्‍वालिटी सर्टिफिकेट प्राप्‍त लेना अनिवार्य होगा। यदि इस अवधि तक प्रमाण पत्र नहीं लिया तो उनकी संबद्धता समाप्‍त हो जाएगी। इस मामले में कार्रवाई आयुष्‍मान भारत योजना के द्वारा की जाएगी।
डॉ संजय मिश्रा
सीएमएचओ व प्रभारी रीजनल डायरेक्‍टर हेल्‍थ

Back to top button