नरसिंह मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया, स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी ने दी भक्ति की सीख

श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर प्रवचन

जबलपुर। श्रीमद भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर परम् पूज्य श्रीमद् जगदगुरु नृसिंहपीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज श्री ने कहा — “इदं भागवतं नाम पुराणं ब्रह्म सम्मितम्”, यह कथा ब्रह्म सम्मित है अर्थात् वेदों का तात्पर्य इसमें वर्णित है। इसके श्रवण मात्र से हृदय में दृढ़ भक्ति का उदय हो जाता है और भक्ति के प्रभाव से जीवन के सारे क्लेश समाप्त हो जाते हैं।

“उपजी राम भगति दृढ़ बीते सकल कलेश” — कथा श्रवणमात्र से परमात्मा के चरणों में रति, प्रीति और भक्ति का सहज ही उदय हो जाता है।

अजामिल और प्रह्लाद चरित का भावपूर्ण वर्णन

स्वामी जी ने अजामिल की कथा सुनाते हुए बताया कि वह पापी होते हुए भी अपने पुत्र को “नारायण” कहकर पुकारता था, परंतु भगवान की करुणा से पार्षद आकर यमदूतों को मार भगाते हैं और अजामिल का उद्धार करते हैं।

इसके बाद स्वामी जी ने पावन प्रह्लाद चरित का वर्णन किया और कहा कि ईश्वर कितना दयालु है — जिसने दुष्ट हिरण्यकशिपु की यातना से रक्षा करने के लिए भयंकर नृसिंहावतार धारण कर भक्त की रक्षा तथा असुर का उद्धार किया।

भगवान के विविध अवतारों का वर्णन और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का उत्सव

स्वामी जी ने भगवान के विविध अवतारों का वर्णन करते हुए श्रीरामावतार और फिर श्रीकृष्णावतार की महिमा बताई। कथा के अंत में सभी भक्तों द्वारा बड़े धूमधाम से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव सम्पन्न हुआ। पूरे मंदिर परिसर में “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष गूंज उठे।

व्यासपीठ पूजन और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति

व्यासपीठ का पूजन कमलेश शुक्ल ने किया। आयोजन में सतेन्द्र ज्योतिषी, विवेक, विकास, रामरंजन शुक्ल सहित अनेक भक्तों की सहभागिता रही।

इस अवसर पर पूज्य दंडी स्वामी कलिकानंद जी महाराज, विधायक अजय विश्नोई, विधायक नीरज सिंह ठाकुर, हाईकोर्ट जबलपुर के अध्यक्ष डी. के. जी. परितोष त्रिवेदी, राजेंद्र प्यासी और गीता पांडेय सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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