
जबलपुर। भौतिक संसार की नश्वरता का बोध कराने के लिए ही भगवान महादेव अपने शरीर पर राख धारण करते हैं। यह संसार और इसमें मौजूद हर वस्तु कालांतर में एक दिन राख बन जाती है। हमारे द्वारा अर्जित भौतिक संपत्तियां और हमारा शरीर भी एक मुट्ठी राख से अधिक नहीं है। भगवान शिव यह संदेश देते हैं कि किसी भी वस्तु का अभिमान व्यर्थ है, क्योंकि सब कुछ नाशवान है।
राख है जीवन का अंतिम सत्य
जीवन का अंतिम और अमिट सत्य “राख” ही है। यह प्रत्येक वस्तु का सार है और इसी को भगवान शिव अपने शरीर पर धारण करते हैं। यह दृष्टिकोण मनुष्य को विनम्रता, सेवा और त्याग की ओर ले जाता है।
परमार्थ में करें प्रभुकृपा से प्राप्त फल का उपयोग
श्रीमद् जगतगुरु नृसिंह पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नरसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि जो भी प्रभु कृपा से हमें प्राप्त होता है, उसका उपयोग परमार्थ, परोपकार, सद्कार्य और सेवा में होना चाहिए। उन्होंने कहा – “मिल-बांट कर खाना सीखो, यही मनुष्यता है, यही दैवत्व है और यही जीवन की परम सार्थकता भी है।”
श्रावण मास में महादेव के रुद्राभिषेक के साथ हुआ दिव्य आयोजन
पावन श्रावण मास के अंतर्गत नरसिंह मंदिर, शास्त्री ब्रिज में आयोजित श्री नर्मदेश्वर महादेव के रूद्राभिषेक, षोडशोपचार पूजन, अर्चन और आरती के दौरान स्वामी जी ने यह दिव्य विचार प्रकट किए।
भक्तों की रही सहभागिता
पूजन अर्चन आरती में डॉ. बी. के. भारद्वाज, एस. बी. मिश्रा, रामजी पुजारी, आचार्य रामफल शास्त्री, कामता गौतम, लालमणि मिश्रा, ब्रह्मचारी हिमांशु, प्रियांशु सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
प्रतिदिन होता है महारुद्राभिषेक
नरसिंह मंदिर में प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से परम पूज्य महाराज जी के सान्निध्य में महारुद्राभिषेक पूजन का आयोजन किया गया है, जिसमें श्रद्धालु प्रतिदिन भाग ले रहे हैं।