
जबलपुर। परम् पूज्य श्रीमद् जगदगुरू नृसिंहपीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज श्री ने कहा कि “इदं भागवतं नाम पुराणं ब्रह्म सम्मितम्” — यह कथा ब्रह्म सम्मित है, अर्थात वेदों का तात्पर्य इसमें वर्णित है। इसके श्रवण मात्र से हृदय में दृढ़ भक्ति का उदय होता है और भक्ति के प्रभाव से जीवन के सारे क्लेश समाप्त हो जाते हैं। जैसे कहा गया है — “उपजी राम भगति दृढ़ बीते सकल कलेश।”
श्रवण से उत्पन्न होती है भक्ति, मिटते हैं क्लेश
स्वामी जी ने कहा कि भागवत कथा श्रवणमाला से परमात्मा के चरणों में रति, प्रीति और भक्ति का सहज ही उदय होता है। कथा के माध्यम से मनुष्य के जीवन में ईश्वर के प्रति प्रेम और विश्वास बढ़ता है, जिससे जीवन का उद्देश्य स्पष्ट होता है।
अजामिल का उद्धार — नारायण नाम का प्रभाव
स्वामी जी ने बताया कि अजामिल पापी होने के बावजूद जब अपने पुत्र को “नारायण” कहकर पुकारता है, तब भगवान की करुणा से विष्णु पार्षद आकर यमदूतों को भगा देते हैं और अजामिल का उद्धार होता है। यह दर्शाता है कि भगवान का नाम लेने मात्र से ही भय दूर हो जाता है और मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं।
प्रह्लाद चरित्र और नृसिंहावतार का दिव्य वर्णन
पावन प्रह्लाद चरित्र का वर्णन करते हुए स्वामी जी ने कहा कि ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा के लिए हर रूप में प्रकट होते हैं। भगवान नृसिंह ने दुष्ट हिरण्यकशिपु का विनाश कर अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। यह घटना ईश्वर की करुणा और न्याय की अद्भुत मिसाल है।
श्रीराम और श्रीकृष्ण अवतारों की महिमा
स्वामी जी ने भगवान के विभिन्न अवतारों का वर्णन करते हुए श्रीराम और श्रीकृष्ण अवतार की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के अंत में भक्तों द्वारा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। वातावरण भक्ति और उल्लास से गूंज उठा।
व्यासपीठ पूजन और श्रद्धालुओं की सहभागिता
नरसिंह मंदिर जबलपुर में आयोजित कथा में व्यासपीठ का पूजन मुख्य यजमान हेमलता उमेश तिवारी, राजेश-नीलम तिवारी, दीपक तिवारी, वासुदेव तिवारी, महेश तिवारी, रितेश मिश्रा, राजेश त्रिपाठी, दीक्षा, साक्षी, अपरोक्षा और आराध्या द्वारा किया गया।
इस अवसर पर स्वामी पगलानंद जी महाराज, लालमणि त्रिपाठी, अखिलेश तिवारी, संजीव द्विवेदी सहित अनेक भक्त उपस्थित रहे। कथा स्थल भक्ति भाव से परिपूर्ण रहा और श्रद्धालु दिव्य आनंद में सराबोर हो गए।