
भोपाल। आयुर्वेद अस्पतालों में मरीजों का ओपीडी व आईपीडी डाटा सही होना चाहिए। यदि यह गलत या झूठा पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। आयुर्वेद, सिद्धा व यूनानी (एएसयू) मेडिकल कॉलेजों को लेकर नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एनसीआईएसएम), नई दिल्ली इस मामले में सख्त हो गया है।
कॉलेजों की टीचिंग फैकल्टी हो या हॉस्पिटल में मरीजों का ओपीडी व आईपीडी डाटा—यदि फेक पाया गया तो एनसीआईएसएम अधिनियम 2020 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
एनसीआईएसएम ने जारी किया पत्र
मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन, एनसीआईएसएम के प्रेसिडेंट डॉ. मुकुल पटेल ने इस संबंध में पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि कॉलेजों की टीचिंग फैकल्टी अथवा अस्पतालों में मरीजों का ओपीडी और आईपीडी डाटा यदि झूठा सिद्ध हुआ तो एनसीआईएसएम अधिनियम 2020 के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
डाटा में हेराफेरी पर संस्था प्रमुख पर भी कार्रवाई संभव
डॉक्टरों को भी यह समझाइश दी गई है कि वे अपने ज्ञान और कौशल को निरंतर बढ़ाएं। सम्मेलनों, संगोष्ठियों एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने वाले चिकित्सकों को महत्व देने पर बल दिया गया है। आयोग द्वारा अनुभवात्मक शिक्षा और नैदानिक दक्षता को प्राथमिकता दी गई है।
यदि मरीजों के केस सीटों एवं आंकड़ों में हेराफेरी पाई जाती है तो चिकित्सा अधीक्षक एवं संस्था प्रमुख पर भी कार्रवाई हो सकती है।
आयुष अस्पतालों में ओपीडी-आईपीडी रजिस्टरों की होगी जांच
आयुष अस्पतालों में आईपीडी व ओपीडी यानी बहिरंग एवं अंतरंग विभाग के रजिस्टरों में दर्ज मरीजों की संख्या की जांच की जाएगी। आंकड़े गलत मिलने की स्थिति में कार्रवाई संभव होगी।
उल्लेखनीय है कि भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर, बुरहानपुर, उज्जैन, रीवा सहित प्रदेशभर में 39 आयुर्वेद एवं 4 यूनानी कॉलेज स्थापित हैं। इन सभी कॉलेजों के अधीन अस्पताल भी संचालित हैं। वहीं देशभर में 700 से अधिक एएसयू मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं।
सख्ती से होगा गुणवत्ता में सुधार
निश्चित रूप से इस सख्ती से गुणात्मक सुधार होगा। शासकीय हो या निजी कॉलेज, एनसीआईएसएम द्वारा सभी मामलों में पारदर्शिता रखी जाएगी, ऐसा भरोसा है। एएसयू कॉलेजों को ऊंचा उठाने के लिए एनसीआईएसएम की नवीन टीम को हम बधाई देते हैं।
डॉ. राकेश पाण्डेय
राष्ट्रीय प्रवक्ता, आयुष मेडिकल एसोसिएशन