
नई दिल्ली। नशे के खिलाफ लड़ाई में भारत सरकार के सभी विभागों को 2029 तक का रोडमैप और उस पर अमल के लिए समयबद्ध समीक्षा की पद्धति बनानी चाहिए। 31 मार्च, 2026 से हम सब एक साथ इस समस्या के खिलाफ 3 साल का एक सामूहिक अभियान चलाएंगे, जिसमें नशे की समस्या के खिलाफ सभी स्तंभों की कार्यपद्धति परिभाषित की जाएगी और लक्षांक तय कर इसकी समयबद्ध समीक्षा होगी।
यह बात केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 9वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक में कही। केंद्रीय गृह मंत्री ने बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के अमृतसर कार्यालय का उद्घाटन भी किया। NCB द्वारा हाइब्रिड मोड में आयोजित इस बैठक में केन्द्र सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों के प्रमुख हितधारक तथा राज्य सरकारों के प्रतिनिधि और ड्रग लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों ने भाग लिया।
एक्शन प्लान के साथ आगे बढ़ेंगे
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में विगत 11 साल में हमने नशे के खिलाफ लड़ाई में काफी सफलता प्राप्त की है और 2019 में एनकॉर्ड के पुनर्गठन के बाद हमने इस समस्या पर संपूर्ण नियंत्रण करने के रास्ते को भी सुनिश्चित किया है। अब हमने स्पीड बना ली है और तीन सूत्रीय प्लान ऑफ एक्शन के साथ आगे बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि हम ड्रग्स की सप्लाई चेन के प्रति सामूहिक रूथलैस अप्रोच, डिमांड रिडक्शन के प्रति स्ट्रेटेजिक अप्रोच और हार्म रिडक्शन के लिए ह्यूमन अप्रोच के साथ आगे बढ़ें, तभी नशामुक्त भारत का लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे।
ड्रग्स बनाने और बेचने वालों के प्रति कोई दयाभाव नहीं
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि एनकॉर्ड बैठकों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन इसे और बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ज़िलास्तरीय व राज्यस्तरीय बैठकें नियमित रूप से होनी चाहिए। श्री शाह ने कहा कि भारत सरकार की अप्रोच बहुत स्पष्ट है कि ड्रग्स बनाने वाला और बेचने वाला, दोनों के प्रति कोई दयाभाव नहीं रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ड्रग्स के विक्टिम के प्रति हमें मानवतापूर्ण दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि कमांड, कम्प्लायंस और एकाउंटेबिलिटी को सुदृढ़ करते हुए ही हमें इस लढ़ाई में आगे बढ़ना चाहिए। अब हमें बैठकों की संख्या नहीं बल्कि इनके परिणामों की समीक्षा करनी चाहिए।
किंगपिन और नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई
उन्होंने कहा कि नशे के व्यापार के किंगपिन, फायनेंसर और लॉजिस्टिक्स के रूट्स पर की जाने वाली कठोर कार्यवाही हमारी समीक्षा का मुद्दा होना चाहिए। श्री शाह ने यह भी कहा कि हमें FSL का उपयोग और समय पर चार्जशीट दाखिल कर सजा कराने की दर बढ़ाने को भी अपने लक्ष्यों में शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि टॉप टू बॉटम और बॉटम टू टॉप अप्रोच ड्रग्स के पूरे नेटवर्क की जांच के लिए बेहद ज़रूरी है।
रोडमैप तैयार करने के निर्देश
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे ड्रग्स की समस्या से निपटने की अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के अनुसार 31 मार्च तक एक रोडमैप तैयार करें, निगरानी तंत्र स्थापित करें और उस पर पूरी तरह फोकस करें, ताकि इस समस्या का संपूर्ण समाधान हो सके।
उन्होंने कहा कि हमें अगले तीन वर्षों में देश में ड्रग्स के खिलाफ सभी मोर्चों पर लड़ाई लड़कर ‘नशा मुक्त भारत’ बनाना है और देश के युवाओं को ड्रग्स से सुरक्षित रखने का प्रयास करना है।
फॉरेंसिक लैब और ड्रग विनिष्टीकरण पर जोर
ड्रग्स के खिलाफ इस लड़ाई में फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की बहुत अहम भूमिका है। जिन राज्यों में जब्त की गई ड्रग्स को नष्ट करने के काम की गति धीमी है, उन्हें इसमें तेजी लानी होगी। उन्होंने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों से आग्रह किया कि वे अपने राज्य में रोडमैप तैयार कर समयबद्ध ड्रग विनिष्टीकरण के लिए ठोस कदम उठाएं।
देश की अगली पीढ़ी की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 में आजादी की शताब्दी के समय भारत को पूरे विश्व में हर क्षेत्र में सर्वप्रथम बनाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे भारत की रचना करने के लिए हम सब का यह दायित्व है कि हम युवा पीढ़ी को ड्रग्स से संपूर्ण सुरक्षा दें। श्री शाह ने कहा कि अभी यह लड़ाई ऐसे मुकाम पर है कि हम इससे जीत सकते हैं और देश की अगली पीढ़ियों को बचाने का काम हम शीर्ष प्राथमिकता के साथ करेंगे।
क्या है NCORD
NCORD मैकेनिज़्म एक चार-स्तरीय संरचना है, जिसमें शीर्ष स्तर की NCORD समिति शामिल है, जिसकी अध्यक्षता केन्द्रीय गृह सचिव द्वारा की जाती है। कार्यकारी स्तर की NCORD समिति की अध्यक्षता गृह मंत्रालय के विशेष सचिव द्वारा की जाती है। राज्य स्तर की NCORD समितियों की अध्यक्षता राज्यों के मुख्य सचिवों द्वारा और जिला स्तर की NCORD समितियों की अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेटों द्वारा की जाती है।
NCORD मैकेनिज़्म की स्थापना वर्ष 2016 में की गई थी, ताकि राज्यों, गृह मंत्रालय तथा संबंधित हितधारकों के बीच समन्वय को बढ़ावा दिया जा सके और देश में नशीली दवाओं की समस्या को समग्र रूप से निपटा जा सके।