
भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मध्यप्रदेश शासन से सवाल किया है कि प्रदेश के आठ शहरों भोपाल, जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, देवास, सिंगरौली और सागर में प्रदूषण नियंत्रित क्यों नहीं हो पा रहा है। इन शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण और धुंध को लेकर एनजीटी ने गंभीर चिंता व्यक्त की है।
एनजीटी ने कहा कि नागरिकों का यह मौलिक अधिकार है कि वे स्वच्छ हवा में सांस लें, लेकिन राज्य में इस अधिकार का लगातार उल्लंघन हो रहा है। पर्यावरणविद् एवं आवेदक राशिद नूर खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से जवाब मांगा है।
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान पर सवाल
एनजीटी ने यह भी पूछा है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा मध्यप्रदेश के इन आठ शहरों को नॉन अटेनमेंट सिटी घोषित किए जाने के बावजूद दिल्ली एनसीआर में लागू ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान अब तक क्यों लागू नहीं किया गया।
समझिए क्या होती है नॉन अटेनमेंट सिटी
देश के 131 शहरों में प्रदूषण लगातार 5 वर्षों तक नेशनल एयर एंबिएंट क्वालिटी स्टैंडर्ड से अधिक पाया गया। यानी इन शहरों में पीएम-10 और पीएम-2.5 का स्तर लगातार तय मानकों से ऊपर रहा। इनमें मध्यप्रदेश के ये 8 शहर भी शामिल हैं।
मध्यप्रदेश के इन शहरों में पीएम-10 का औसत स्तर 130 से 190 और पीएम-2.5 का स्तर 80 से 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया। इन्हें सीपीसीबी द्वारा वर्ष 2016 में नॉन अटेनमेंट सिटी घोषित किया गया था।
ऐसे शहरों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाना अनिवार्य होता है, जिसमें यह बताया जाता है कि प्रदूषण के कारण क्या हैं और उसे कैसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से फंड भी प्रदान किया जाता है।
7 सदस्यीय समिति गठित
एनजीटी ने इस मामले में 7 सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति में प्रमुख सचिव पर्यावरण, नगरीय विकास, परिवहन एवं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल तथा एप्को के एक-एक अधिकारी शामिल होंगे।
इसके साथ ही एमपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के सदस्य सचिव और सीपीसीबी के पूर्व अतिरिक्त निदेशक डॉ. रवि प्रकाश मिश्रा भी समिति के सदस्य रहेंगे। एनजीटी ने समिति से 6 सप्ताह के भीतर स्थिति का आकलन कर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।