
पन्ना। पन्ना टाइगर रिजर्व में 6 नवंबर को सफारी करने पहुंचे पर्यटकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब उन्होंने पेड़ के नीचे आराम फरमाती टाइग्रेस को देखा। पेड़ के नीचे सोती हुई टाइग्रेस यदा-कदा अपना चेहरा उठाकर देखती फिर सो जाती, पर्यटक इंतजार करते रहे कि वह उठकर कुछ कदम चलेगी लेकिन टाइग्रेस आराम फरमाती रही और पर्यटक उसे देखते रहे। पन्ना से करीब 25 किमी दूर पन्ना टाइगर रिजर्व के मड़ला गेट के कोर एरिया में टाइग्रेस देखने मिली।
टाइग्रेस ने हाल ही में दिए हैं दो शावकों को जन्म
पर्यटकों ने जब गाइड से इसकी जानकारी ली तो पता चला कि इसने कुछ सप्ताह पहले ही दो शावकों को जन्म दिया है। इसके पहले भी यह दो बार शावकों को जन्म दे चुकी है। इन दिनों कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना टाइगर रिजर्व और पेंच जैसे सभी अभयारण्यों में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। यहां के रिर्सोट फुल हैं और पर्यटक मॉर्निंग व नाइट सफारी का आनंद ले रहे हैं।
पन्ना टाइगर रिजर्व में टाइगर का साम्राज्य
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व प्रदेश के उत्तर में पन्ना और छतरपुर जिलों में फैला हुआ है। इसे 1981 में बनाया गया और 1994 में केंद्र सरकार द्वारा परियोजना टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। पन्ना भारत का 22वां और मप्र का 5वां टाइगर अभयारण्य है। 2007 में भारत के पर्यटन मंत्रालय ने इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ रखरखाव वाले राष्ट्रीय उद्यान के रूप में पुरस्कृत किया था।
वनस्पति और वन्यजीवों की विविधता
यहां सागौन, कत्था, गोंद, बांस के पेड़ प्रमुख रूप से पाए जाते हैं। साथ ही चीतल, चिंकारा, नीलगाय, जंगली सूअर, सांभर, भालू जैसे वन्य जीव पर्यटकों को देखने मिलते हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व में लाल सिर वाला गिद्ध भी पाया जाता है, जो अब दुर्लभ प्रजातियों में शामिल है। इस अभयारण्य में लगभग 70 से अधिक टाइगर हैं, जो यहां की जैव विविधता को और भी समृद्ध बनाते हैं।
वल्चर भी आकर्षण का केंद्र
कोर एरिया में स्थित गहरी खाई में वल्चर (गिद्ध) पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। यहां की खोहों और चट्टानों में बड़ी संख्या में गिद्ध देखे जा सकते हैं। ये दुर्लभ पक्षी पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं और वाइल्डलाइफ प्रेमियों के लिए पन्ना को एक अनोखा अनुभव प्रदान करते हैं।