Ganesh Utsav: श्री गणेश चंद्र स्वरूप हैं, जो अपनी किरणों से औषधियों को पुष्ट और तृप्त करते हैं

सहस्त्रार्चन और मक्खन से अभिषेक

जबलपुर। श्री गणेश जन्मोत्सव का सप्तम दिवस, मंगलवार 2 सितंबर 2025 को ललपुर रोड, गौरीघाट स्थित श्री सिद्ध रजत गणेश मंदिर में अत्यंत भव्यता और श्रद्धाभाव के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर भक्तों ने विशेष सहस्त्रार्चन अनुष्ठान में भाग लिया। श्री गणेश जी का 1000 नामों के साथ छुहारा और मखानों द्वारा सहस्त्रार्चन किया गया। साथ ही भगवान गणेश का मक्खन से अभिषेक कर पूजन-अर्चन किया गया। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और हर कोई इस दिव्य अनुष्ठान का साक्षी बनने के लिए उत्सुक दिखाई दिया।

चंद्र स्वरूप हैं श्री गणेश

पूजन से पूर्व संस्थापक महंत स्वामी प्रमोद महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि “श्री गणेश चंद्र स्वरूप हैं। जो अपनी किरणों से औषधियों को पुष्ट और तृप्त करते हैं, अमृत वर्षा की कलाओं द्वारा देव समुदाय का पोषण करते हैं, सूर्य की किरणों से उत्पन्न संताप को दूर कर देते हैं और जो द्विजों के राजा कहे जाते हैं, वही चंद्र स्वरूप श्री गणेश हैं। इस रूप की पूजा करने से जीवन में समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।”
उनके इस आध्यात्मिक संदेश से वातावरण भक्ति और आस्था से परिपूर्ण हो गया।

लाल वस्त्रों से विशेष श्रृंगार

मंगलवार के दिन भगवान गणेश का लाल वस्त्रों से भव्य श्रृंगार किया गया। भगवान रजत गणेश को सुगंधित पुष्पों, आभूषणों और दीपमालाओं से सजाया गया, जिससे उनका रूप अत्यंत मनमोहक दिखाई दिया। इस श्रृंगार दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ लगातार उमड़ती रही। मंदिर परिसर में श्रद्धालु अपनी-अपनी मनोकामनाओं की अर्जी रजत गणेश जी के समक्ष लगाते रहे और प्रसन्नचित्त भाव से भगवान की कृपा का आशीर्वाद प्राप्त करते रहे।

भव्य महाआरती और प्रसाद वितरण

सांयकालीन बेला में श्री रजत गणेश जी की भव्य महाआरती सम्पन्न हुई। घंटे-घड़ियाल और शंखनाद के साथ वातावरण “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने दीपों की आरती कर भगवान गणेश के समक्ष अपनी श्रद्धा अर्पित की।
महाआरती के पश्चात भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में भोजन वितरित किया गया। मंदिर समिति ने बताया कि भंडारे में बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्यलाभ अर्जित किया।

पूजन विधि और भक्तों की सहभागिता

पूजन विधि का संचालन आचार्य रामकिशोर ने विधिपूर्वक सम्पन्न कराया। इस अवसर पर राजकुमार, प्रीति तिवारी, जीतेन्द्र, चंचल, हर्षिता सक्सेना, अनुष्का भट्ठा, राजपाल पाठक, रमा कुशवहा, अजय झरिया और सुमित शर्मा सहित अनेक श्रद्धालुओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। सभी ने भगवान गणेश के चरणों में अपनी भक्ति और आस्था प्रकट की।

समृद्धि का प्रतीक चंद्र स्वरूप

मंदिर समिति के अनुसार चांदी के गणेश या रजत स्वरूप की पूजा करने से जीवन में धन, सुख और समृद्धि आती है। चंद्र स्वरूप गणेश का पूजन मानसिक शांति, सौभाग्य और जीवन में सकारात्मकता प्रदान करता है। यही कारण है कि इस दिन मंदिर में भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था और हर कोई अपने जीवन की मंगलकामनाओं के साथ प्रभु से आशीर्वाद लेने पहुंचा।

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