
जबलपुर। सीएम हेल्प लाइन में छात्रों के द्वारा शिकायत का एक मामला सामने आया है। यह मामला रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से जुड़ा हुआ है। रादुविवि में पीएचडी प्रवेश परीक्षा में सफल 500 विद्यार्थी परेशान हैं। प्रवेश परीक्षा के परिणाम को जारी हुए तीन माह बीत गए है लेकिन अभी तक विद्यार्थियों को पीएचडी में प्रवेश नहीं मिला है। अब परेशान विद्यार्थी सीएम हेल्पलाइन में शिकायत कर रहे हैं। बताया जाता है कि इस देरी की वजह अधूरी तैयारी है। प्रशासन ने परीक्षा शुरू करने से पहले पीएचडी पाठ्यक्रम की फीस ही तय नहीं की थी।
छात्र परेशान
विश्वविद्यालय ने 6 अगस्त को डॉक्टोरल एंट्रेंस टेस्ट के अंतिम चयन परिणाम घोषित किए थे, जिसमें 510 शोधार्थियों का चयन हुआ था। परंतु आज तक किसी का भी प्रवेश सुनिश्चित नहीं हो पाया। प्रवेश प्रक्रिया में यह ठहराव केवल छात्रों के धैर्य की परीक्षा नहीं ले रहा, बल्कि विश्वविद्यालय की साख पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहा है। कई चयनित उम्मीदवार अब अन्य विश्वविद्यालयों का रुख कर रहे हैं, जिससे आरडीयू को न केवल राजस्व की हानि होगी बल्कि शोधार्थियों की संख्या में भी कमी हो सकती है।
अब तक आदेश नहीं
बीते आठ अक्टूबर को आयोजित हुई विद्यापरिषद की बैठक में पीएचडी फीस निर्धारण के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति (प्रो. एस.एस. संधु, प्रो. राकेश बाजपेई, प्रो. ममता राव) की अनुशंसाओं को अभिस्वीकृति दे दी गई थी। लेकिन समस्या यहीं समाप्त नहीं हुई। उक्त प्रस्ताव को अब कार्यपरिषद में रखा जाना है। कार्यपरिषद की स्वीकृति के बाद नई फीस संरचना लागू हो पाएगी। फिलहाल, इस बैठक की तिथि तक तय नहीं की गई है।
कुलपति के पास अधिकार
मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के अध्याय तीन की धारा 15 उपधारा (4) के अनुसार, कुलपति छात्रहित में या आकस्मिक परिस्थितियों में कार्यपरिषद की स्वीकृति की प्रत्याशा में किसी प्रस्ताव को तत्काल अनुमोदित कर सकते हैं। अर्थात कुलपति चाहें तो कार्यपरिषद की बैठक के बिना भी फीस प्रस्ताव को अस्थायी रूप से मंजूरी देकर प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन और शीर्ष अधिकारियों ने इस प्रावधान का उपयोग न कर छात्रों को अनावश्यक प्रतीक्षा में डाल दिया है।
छात्रों ने दर्ज कराईं सीएम हेल्पलाइन में शिकायतें
विश्वविद्यालय की उदासीनता से त्रस्त शोधार्थियों ने अब मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का सहारा लिया है। सूत्रों के अनुसार, अब तक तीन शिकायतें विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी हुई दर्ज की जा चुकी हैं। छात्रों का कहना है कि तीन महीनों से प्रशासनिक ढिलाई के कारण उनका कीमती समय और शोध-उत्साह दोनों नष्ट हो गए हैं।