Jabalpur Flyover: 23 अगस्‍त 2025’ बनेगी जबलपुर विकास के नए उड़ान की तारीख, देखें वीडियो

जबलपुर। जबलपुर के इतिहास में शनिवार 23 अगस्‍त 2025 को मध्‍यप्रदेश के सबसे बड़े फ्लाइओवर का लोकार्पण हो रहा है। यह तारीख महज एक तारीख नहीं है बल्कि यह जबलपुर के इतिहास में दर्ज हो जाएगी। जिसे बरसों आने वाली पीढि़यां याद रखेंगी। इस तारीख की प्रतीक्षा जबलपुरवासी बरसों से कर रहे थे।

यह तारीख जबलपुर के वासियों को उस तग्‍मे से निजात दिलाएगी जिसमें कहा जाता रहा है कि जबलपुर बड़ा कस्‍बा है जहां एक भी फ्लाइओवर नहीं है। अब ऐसा फ्लाइओवर बना जोकि मध्‍यप्रदेश का सबसे बड़ा फ्लाइओवर है। फ्लाइओवर का लोकार्पण 23 अगस्‍त शनिवार को केन्‍द्रीय सड़क परिवहन एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी करेंगे। इस अवसर पर सीएम डॉ मोहन यादव, उपमुख्‍यमंत्री राजेंद्र शुक्‍ल, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह मौजूद रहेंगे।

देश में अनूठा: 192 मीटर सिंगल स्पान केबल-स्टे, तीन बो-स्ट्रिंग ब्रिज

लगभग 1052 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 6.855 किलोमीटर लंबा यह एलिवेटेड कॉरिडोर न केवल मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा फ्लाईओवर है, बल्कि इसमें कई ऐसी विशेषताएं भी शामिल हैं जो इसे विशिष्ट पहचान देती हैं। इस फ्लाईओवर का सबसे बड़ा तकनीकी आकर्षण रेल मार्ग के ऊपर निर्मित 192 मीटर लंबा सिंगल स्पान केबल स्टे ब्रिज है। इस परियोजना में कुल 3 बो-स्ट्रिंग ब्रिज भी शामिल किए गए हैं। इनमें से दो पुल रानीताल क्षेत्र में और एक पुल बलदेवबाग क्षेत्र में बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि ये सभी पुल पूरी तरह स्टील से निर्मित हैं और प्रत्येक की लंबाई लगभग 70 मीटर है। आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों से निर्मित यह संरचना न केवल जबलपुर बल्कि पूरे देश के लिए एक अद्वितीय और प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करती है।

मध्‍यप्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह का कहना है कि 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में सरकार बनी और नितिन गडकरी जबलपुर आए थे तब जबलपुर में फ्लाइओवर की मांग की गई। जिसमें उन्‍होंने स्‍वीकृति दी। मैंने फ्लाइओवर निर्माण का संकल्‍प 2004 में लिया था। 2014 में सरकार बनने के बाद श्री गडकरी की स्‍वीकृति के बाद इसमें जमीनी स्‍तर पर कार्य हुआ और 23 अगस्‍त 2025 को सपना साकार हो रहा है।

मदन महल दमोह नाका फ्लाईओवर 23 अगस्‍त को लोकार्पित हो जाएगा।

पर्यावरण और जनसुविधाएं साथ-साथ

इस फ्लाईओवर निर्माण में पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा गया है। इसके नीचे लगभग 50 हजार पौधों का रोपण किया गया है, जिससे शहर का हरित आवरण बढ़ेगा और प्रदूषण पर नियंत्रण में मदद मिलेगी। नागरिकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए फ्लाईओवर के नीचे ही बास्केटबॉल कोर्ट, ओपन जिम और बच्चों के लिए पार्क विकसित किए गए हैं। इससे यह केवल एक यातायात सुविधा न होकर एक सामुदायिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र भी बन जाएगा। इसके अतिरिक्त, यात्रियों की सुविधा के लिए 10 स्थानों पर दिशा सूचक बोर्ड भी लगाए गए हैं, जिससे आवागमन और सुगम तथा व्यवस्थित हो सकेगा।

यातायात में क्रांतिकारी बदलाव

यातायात की दृष्टि से यह फ्लाईओवर क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। जहां पहले मदनमहल से दमोह नाका तक पहुँचने में 40 से 45 मिनट का समय लगता था, अब फ्लाईओवर शुरू होने के बाद यह दूरी मात्र 6 से 8 मिनट में तय की जा सकेगी। इससे न केवल समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि शहर में प्रदूषण का स्तर भी घटेगा। व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी, नागरिकों की दैनिक जीवनशैली सरल होगी और जबलपुर एक नए यातायात मॉडल के रूप में देश के अन्य शहरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करेगा।

आधुनिकता–विरासत का संगम

यह परियोजना जबलपुर की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के बीच आधुनिकता का संगम प्रस्तुत करती है। यह शहर की पहचान को महानगरीय स्वरूप देने में सहायक होगी। स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों के लिए बेहतर आवागमन और जीवनशैली सुनिश्चित करेगी।

फोटो/वीडियो- रवीन्‍द्र विश्‍वकर्मा 

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