
मेरठ। बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में मेरठ की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया है। नीला ड्रम हत्याकांड के नाम से चर्चित इस मामले में मार्च 2025 में सौरभ का शव मिलने के बाद देशभर में सनसनी फैल गई थी। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
नीले ड्रम में मिला था सौरभ का शव
मामला मार्च 2025 में सामने आया था, जब मेरठ में सौरभ राजपूत का शव एक नीले ड्रम के भीतर मिला। शव के टुकड़ों को ड्रम में रखकर सीमेंट से छिपाने की बात जांच में सामने आई थी। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की भूमिका की पड़ताल की और दोनों को गिरफ्तार किया। इसके बाद हत्या तथा साक्ष्य मिटाने से जुड़े आरोपों को लेकर मुकदमा चलाया गया।
13 महीने की सुनवाई, 22 गवाहों के बयान
इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया लगभग 13 महीने चली। सुनवाई के दौरान 126 पेशियां हुईं और अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। दोनों पक्षों की दलीलों और मामले से जुड़े साक्ष्यों पर विचार करने के बाद 30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा की अवधि और स्वरूप को लेकर अलग से सुनवाई हुई।
सजा के बिंदु पर हुई सुनवाई
दोषसिद्धि के बाद अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए दोनों के लिए अधिकतम दंड की मांग की थी। बचाव पक्ष को भी सजा के बिंदु पर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। अदालत के निर्णय के साथ इस चर्चित मामले में सजा सुनाए जाने का महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है।
देशभर में चर्चा में रहा नीला ड्रम हत्याकांड
सौरभ राजपूत की हत्या और शव को ड्रम में छिपाने की घटना ने व्यापक जनचर्चा को जन्म दिया था। जांच में सामने आए तथ्यों और सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों के चलते यह मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा। अदालत के फैसले के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। मृत्युदंड के मामलों में कानून के तहत उच्च न्यायालय की पुष्टि सहित निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया लागू होती है।