10 अक्टूबर को शनिश्चरी सर्व पितृ अमावस्या पर तिलवारा में होगा भव्य आयोजन

श्री शनिधाम तिलवारा घाट में विशेष पूजन, शनि अभिषेक, पुष्प श्रृंगार, 56 भोग, दिव्य आरती

जबलपुर। युवाओं और श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था के विशेष अवसर शनिश्चरी सर्व पितृ अमावस्या पर 10 अक्टूबर को तिलवारा स्थित प्राचीन शनिदेव मंदिर, श्री शनिधाम तिलवारा घाट में भव्य धार्मिक आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर विशेष पूजन, शनि अभिषेक, पुष्प श्रृंगार, 56 भोग, दिव्य आरती एवं भंडारे का आयोजन किया जा रहा है।

शनिवार को पड़ रही अमावस्या, विशेष है धार्मिक महत्व

आश्विन मास की अमावस्या तिथि इस वर्ष शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को पड़ रही है। शनिवार के दिन अमावस्या पड़ने के कारण इसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाएगा। वहीं यह अमावस्या सर्व पितृ अमावस्या के रूप में भी विशेष महत्व रखती है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन शनिदेव की आराधना के साथ-साथ पितरों के तर्पण और स्मरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

सर्व पितृ अमावस्या पर पितरों का तर्पण

सर्व पितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। इस दिन उन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनका श्राद्ध किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर नहीं हो पाया हो। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण एवं तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि बनी रहती है।

शनिवार होने के कारण इस बार अमावस्या का महत्व और भी बढ़ गया है। शनिश्चरी अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालु शनिदेव की पूजा-अर्चना, तेलाभिषेक एवं दीपदान कर शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। वहीं सर्व पितृ अमावस्या के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां नर्मदा सहित पवित्र नदियों एवं तीर्थ स्थलों पर स्नान और तर्पण कर शनिदेव की विधिवत पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

शनिधाम में होगा विशेष पूजन और शनि अभिषेक

श्री शनि अमावस्या के शुभ अवसर पर तिलवारा स्थित प्राचीन शनिदेव मंदिर में भव्य धार्मिक महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। शनिधाम में विशेष पूजन, शनि अभिषेक, पुष्प श्रृंगार, दिव्य आरती एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।

इस अवसर पर 56 भोग भगवान शनिदेव को अर्पित किए जाएंगे। इसके पश्चात श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

शनि की साढ़ेसाती और ढैया से प्रभावित जातकों के लिए विशेष अवसर

पंडित सतीश महाराज ने बताया कि शनिश्चरी अमावस्या शनिदेव की आराधना के लिए विशेष अवसर है। जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैया अथवा शनि की महादशा का प्रभाव माना जाता है, वे इस दिन शनिदेव का पूजन, तेलाभिषेक, दीपदान एवं दान-पुण्य कर शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

पितृ ऋण से मुक्ति और सुख-शांति की कामना

वहीं सर्व पितृ अमावस्या के अवसर पर पितरों का तर्पण एवं स्मरण करने से पितृ ऋण से मुक्ति और परिवार में सुख-शांति की कामना की जाती है। श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि वे इस पावन अवसर पर शनिदेव का पूजन करने के साथ अपने पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण एवं तर्पण करें।

आयोजन में शामिल होने का आग्रह

श्री शनि अमावस्या एवं सर्व पितृ अमावस्या के इस पावन अवसर पर पं. सतीश जी महाराज, पं. अनिल मिश्रा, शुभम् तिवारी, नितिन शर्मा, विध्येश भापकर, सोनू कुररिया, घनश्याम पटेल, नितिन भाटिया, आशीष सिंगहरा, संजय तिवारी, सचिन बुधौलिया, गौरव सेनी, अरविंद अग्रवाल, संदेश वर्मा, राम महार, राज सिंह, विजय पटेल, नितेश राजपूत, विवेक पाण्डेय, शिवा तिवारी, अशोक साहू, गणेश साहू, पट्टू उर्प्रीत, मुकेश राठौर, अभिषेक ठाकुर, विजय ठाकुर, राजकुमार पटेल, रितेश शुक्ला, मनू ठाकुर, ब्रजेश कुशवाह, प्रदीप साहू, सचिन खटिक, मनीष साहू, प्रहलाद बंसल, ईश्वर दास, अमित पटेल एवं कन्हैया विश्वकर्मा ने श्रद्धालुओं से महोत्सव में शामिल होकर पूजन-अर्चन एवं भंडारे का प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया है।

रिपोर्ट: विध्‍येश भापकर