30 साल बाद शरद पूर्णिमा पर दुर्लभ संयोग, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व

हर्षण, वज्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का उल्लेख, ज्योतिषाचार्य ने बताए पूजा और व्रत के नियम

जबलपुर। इस साल शरद पूर्णिमा पर्व पर विशेष ज्योतिषीय संयोग बनने की बात कही जा रही है। ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार, 25 अक्टूबर 2026, रविवार को शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस अवसर पर हर्षण योग, वज्र योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का उल्लेख किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ संयोगों के कारण पर्व का विशेष महत्व रहेगा।

25 अक्टूबर को मनाई जाएगी शरद पूर्णिमा

ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार, पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 25 अक्टूबर, रविवार को सुबह 10:40 बजे होगा और यह 26 अक्टूबर को सुबह 9:40 बजे तक रहेगी। उनके अनुसार, उदय तिथि और धार्मिक परंपरा के आधार पर 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।

अश्विन माह की इस पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो श्रद्धालु जागरण कर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं, उन पर माता लक्ष्मी की कृपा होती है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस वर्ष महालक्ष्मी योग में पूजा का विशेष महत्व बताया जा रहा है।

ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति

ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार, इस साल शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा मीन एवं मेष राशि और मंगल कर्क राशि में रहेगा। ग्रहों की स्थिति और शुभ योगों को ध्यान में रखते हुए इस दिन पूजा-पाठ तथा धार्मिक गतिविधियों का विशेष महत्व बताया गया है।

खरीदारी और नए काम के लिए शुभ मानी जाती है तिथि

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर बनने वाले शुभ संयोग में खरीदारी करना, नए कार्य शुरू करना, पद ग्रहण करना या नई जिम्मेदारी संभालना शुभ माना जाता है। संपत्ति, निवेश और महत्वपूर्ण लेन-देन के लिए भी इस दिन को अनुकूल बताया जाता है। हालांकि, निवेश और वित्तीय फैसले लेते समय अपनी आर्थिक स्थिति और संबंधित जोखिमों का आकलन करना जरूरी है।

शरद पूर्णिमा पर क्या करें?

चंद्रमा को अर्घ्य दें: धार्मिक परंपरा के अनुसार, व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करते हैं। इसके बाद अन्न ग्रहण करने की परंपरा है।

रात्रि जागरण और पूजा: शरद पूर्णिमा की रात देवी लक्ष्मी की पूजा और जागरण का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार भजन, मंत्र जाप और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

चांदनी में कुछ समय बिताएं: लोकमान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की चांदनी में बैठना मन को शांति देने वाला माना जाता है। हालांकि, चांदनी में बैठने से तनाव या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर होने का दावा वैज्ञानिक रूप से सुनिश्चित नहीं है।

घर के बाहर दीपक जलाएं: परंपरा के अनुसार, इस रात घर के बाहर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दीप प्रज्ज्वलित कर सकते हैं।

औषधि और खीर से जुड़ी मान्यताएं

शरद पूर्णिमा की रात औषधियों और चंद्रमा की किरणों से विशेष लाभ मिलने की मान्यता प्रचलित है। कुछ परंपराओं में खुले आसमान के नीचे खीर रखने और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा भी है। हालांकि, चांदनी में रखने से औषधि या भोजन के विशेष चिकित्सकीय लाभ मिलने की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक प्रमाण आवश्यक हैं। भोजन को खुले में रखते समय स्वच्छता और सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।

व्रत और पूजा का धार्मिक महत्व

शरद पूर्णिमा पर श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रत रखते हैं, देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं और रात्रि जागरण करते हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि और मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है। पर्व के अवसर पर परिवार के साथ पूजा और धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने की परंपरा भी प्रचलित है।