
पन्ना। जैसे-जैसे रात बीती महामति श्री प्राणनाथ जी मंदिर में देश-विदेश से आए हजारों की संख्या में श्रद्धालु सुंदरसाथ उस क्षण की प्रतीक्षा करने लगे जब अखंड रास के रचयिता श्रीजी की सवारी बंगला जी दरबार साहब से रासमण्डल के लिये निकलेगी। जैसे ही वह पल आया पूरे मंदिर प्रांगण (ब्रह्म चबूतरा) का वातावरण अलौकिक हो गया। उपस्थित श्रद्धालु सुंदरसाथ अपने प्रीतम की भक्ति में इस कदर मस्त हो गए कि वह अपनी शुद्ध-बुद्ध भूल कर अपने पिया के रंग में रंगे हुए दिखे।
जैसे ही श्री जी की सवारी रास मंडल में पहुंची तो पूरे प्रांगण में महिलाएं, पुरुष, बच्चे, बुजुर्ग रासलीला में खो गए और चारों ओर टोलियां की टोलियां अपने प्रीतम को मनाने में और उनके साथ रास-गरबा नृत्य में इस कदर डूबी रहीं कि पूरी रात कैसे निकल गई यह किसी को पता ही नहीं चला।

सोलह सिंगार कर सखियां अपने प्रीतम को रिझाते दिखीं
शरद पूर्णिमा की रात में सखियां अपने प्रीतम को रिझाने के लिए सोलह सिंगार कर मंदिर पहुंचीं और पूरी रात अपने पिया के साथ रास-गरबा करके उन्हें रिझाने में लगी रहीं। ऐसा प्रतीत होता था कि स्वयं अखंड रास के रचयिता स्वयं आकर अपनी सखियों के साथ रास खेल रहे हों। यह दृश्य भक्तों के हृदय में गहराई तक भक्ति और प्रेम का संचार कर गया।

पूरे दिन चलते रहे भजन गायन और गरबा नृत्य के कार्यक्रम
पूरी रात अखंड रास चलने के बाद मंगलवार की सुबह से ही पूरे दिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन चलता रहा। विद्वान, विदुषी और धर्मगुरुओं द्वारा उपस्थित श्रद्धालु सुंदरसाथ को परमधाम के संबंध में और अखंड रास के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया। मंदिर प्रांगण में भजन-कीर्तन, प्रवचन और रास-गरबा के कार्यक्रमों ने भक्तिमय माहौल को और भी गहरा बना दिया।