
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बेसहारा कुत्तों पर फैसला सुनाते हुए कहा कि जिन कुत्तों को पकड़ा जाता है उनकी नसबंदी और टीकाकरण किया जाए उसके बाद उन्हें छोड़ दिया जाए। रैबीज से संक्रमित वा खतरनाक कुत्तों को सड़क पर नहीं छोड़ा जाएगा। सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना नहीं खिलाया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसके लिए नेशनल लेवल पर नीति की जरूरत है। अगली सुनवाई अक्टूबर में होगी।
11 अगस्त के फैसले पर रोक
सुप्रीम कोर्ट अपने 11 अगस्त के फैसले पर रोक लगाते हुए कहा कि जो आवारा कुत्ते पकड़े गए हैं उनका टीकाकरण किया जाए उसके बाद उन्हें छोड़ दिया जाए। खतरनाक और रैबीज संक्रमित कुत्तों को शेल्टर होम में रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका लगाने वाले डॉग लवर्स को 25 हजार रूपए व एनजीओ को दो लाख रूपए जमा कराने के आदेश दिए।
लगेगा जुर्माना
कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर खाना खिलाने पर रोक लगाई गई है। जो संस्थाएं या लोग इस आदेश का उल्लंघन करेंगे उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। भोजन के लिए विशेष फीडिंग जोन बनाए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार 22 अगस्त 2025 को आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि अब दिल्ली और उसके उपनगरों में पकड़े गए कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद वापस उसी इलाके में छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था। इस फैसले ने पहले के उस आदेश को संशोधित किया है जिसमें सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर में भेजने और वहीं रखने का निर्देश दिया गया था।
नसबंदी और टीकाकरण वाले कुत्ते होंगे रिलीज
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि जिन आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण हो चुका है, उन्हें उसी स्थान पर छोड़ना अनिवार्य होगा जहां से उन्हें उठाया गया था। इससे न केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि इलाके में कुत्तों के पुनर्संतुलन की प्रक्रिया भी बनी रहेगी।
रेबीजग्रस्त और आक्रामक कुत्तों की अलग व्यवस्था
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि रेबीज से संक्रमित या आक्रामक व्यवहार वाले कुत्तों को वापस नहीं छोड़ा जाएगा। ऐसे कुत्तों की देखभाल और प्रबंधन अलग से किया जाएगा ताकि लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर कोई खतरा न बने।
सार्वजनिक स्थानों पर खाना खिलाने पर रोक
फैसले में कहा गया है कि अब सड़कों पर या सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने की अनुमति नहीं होगी। इसके लिए स्थानीय प्रशासन को निर्धारित फीडिंग ज़ोन बनाने होंगे जहां सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से कुत्तों को भोजन कराया जा सके।
देशव्यापी नीति बनेगी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला केवल दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे देश में एकीकृत नीति बनाई जानी चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों को निर्देश दिया कि वे एक राष्ट्रीय स्तर की नीति तैयार करें जिससे कुत्तों और इंसानों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है। मेनका गांधी ने इसे वैज्ञानिक निर्णय बताया और कहा कि इससे पशु और मानव दोनों के अधिकारों का संतुलन कायम होगा।