विदेशी छात्र भी भारत में आकर आयुर्वेद-आयुष का अध्ययन-अध्यापन व रिसर्च कर सकेंगे

भारत में विदेशी छात्रों को मिलेगा आयुष शिक्षा का अवसर

नई दिल्ली। केंद्रीय आयुष मंत्रालय भारत सरकार जहां राष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद और आयुष को बढ़ावा दे रहा है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे वैश्विक पहचान दिलाने में जुटा है। मंत्रालय की ओर से विदेशी छात्रों को भारत में आयुष चिकित्सा, शिक्षा और अनुसंधान के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। इसके लिए 104 सीटें विदेशी छात्रों के लिए आरक्षित की गई हैं। विशेष बात यह है कि इन छात्रों को छात्रवृत्ति, ट्यूशन फीस और यात्रा व्यय भी उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, विश्व स्तर पर आयुष उत्पादों और सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आयुष सेवा प्रदाताओं को भी सहायता दी जा रही है।

आयुष को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की कोशिश

आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पांडेय ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि आयुष मंत्रालय विदेशों में कार्यशालाएं, संगोष्ठियां और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। साथ ही विभिन्न देशों में आयुष अकादमिक चेयर की स्थापना भी की जा रही है। आयुष का 24 देशों के साथ समझौता हुआ है और 43 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

15 देशों में आयुष पीठों की स्थापना

ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस, लातविया, हंगरी, स्लोवेनिया, आर्मेनिया, रूस, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश और थाईलैंड सहित 15 देशों में आयुष अकादमिक पीठों की स्थापना के लिए समझौते किए गए हैं। इसके अलावा 39 देशों में आयुष सूचना प्रकोष्ठ (Information Cell) की स्थापना की जा चुकी है।

कई देशों के साथ हुआ सहयोग

अब तक नेपाल, बेल्जियम, हंगरी, त्रिनिदाद-टोबेगो, मलेशिया, मॉरीशस, मंगोलिया, तुर्कमेनिस्तान, म्यामार, WHO जिनेवा, जर्मनी, ईरान, साओ टोम, इक्वेटोरियल गिनी, क्यूबा, कोलंबिया, जापान, वोलिनिया, गाम्बिया, गिनी गणराज्य, चीन, सेंट विंसेंट-ग्रेनेडाइंस, सूरीनाम, ब्राजील और जिम्बाब्वे जैसे देशों के साथ आयुर्वेद, पारंपरिक चिकित्सा और होम्योपैथी में सहयोग हेतु समझौते किए गए हैं।

आयुष की वैश्विक पहचान को बल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए डॉ. पांडेय ने कहा कि आयुर्वेद और आयुष की प्रमाणिकता अब वैश्विक स्तर पर स्थापित हो रही है। यह कदम भारत की सांस्कृतिक चिकित्सा प्रणाली को विश्व मंच पर सशक्त करेगा।

विदेशी छात्रों के लिए संभावनाओं के नए द्वार

जैसे भारत के छात्र विदेश जाकर आधुनिक चिकित्सा की पढ़ाई करते हैं, उसी प्रकार आने वाले समय में विदेशी छात्र भी भारत में आकर आयुर्वेद और आयुष का अध्ययन-अध्यापन तथा अनुसंधान करेंगे। डॉ. पांडेय ने बताया कि जैसे ही देशभर के 950 से अधिक आयुष कॉलेजों की मान्यता सत्र 2025-26 के लिए स्पष्ट होगी, विदेशी छात्रों के लिए उपलब्ध सीटों की जानकारी भी जारी की जाएगी।

डॉ. राकेश पांडेय
राष्ट्रीय प्रवक्ता – आयुष मेडिकल एसोसिएशन

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